आईसीएआर-निनफेट में राष्ट्रीय महिला किसान दिवस का आयोजन

उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को किया गया सम्मानित
आईसीएआर-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ नेचुरल फाइबर इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (निनफेट) में राष्ट्रीय महिला किसान दिवस के मौके पर ली गई तस्वीर
आईसीएआर-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ नेचुरल फाइबर इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (निनफेट) में राष्ट्रीय महिला किसान दिवस के मौके पर ली गई तस्वीर
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कोलकाता : कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी, उनके योगदान और आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से गुरुवार को रीजेंट पार्क स्थित आईसीएआर-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ नेचुरल फाइबर इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (निनफेट) में राष्ट्रीय महिला किसान दिवस मनाया गया। इस वर्ष का मुख्य विषय भारतीय कृषि व्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी रहा। कार्यक्रम में महिला किसानों, वैज्ञानिकों और कर्मचारियों के योगदान को रेखांकित करते हुए उन्हें सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान निनफेट के डायरेक्टर डाक्टर डीबी शाक्यवार ने कहा कि भारतीय कृषि व्यवस्था में महिलाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। खेती-किसानी से लेकर कृषि आधारित उद्योगों और उद्यमिता तक उनका योगदान सराहनीय है। इसके बावजूद महिलाओं को कई सामाजिक और आर्थिक बाधाओं का सामना करना पड़ता है। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में इच्छामती फार्मर्स प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड की निदेशक दुलाई दास उपस्थित रहीं। उन्होंने कहा कि निनफेट के सहयोग से गायघाटा क्षेत्र की कई महिलाएं आत्मनिर्भर बनी हैं। संस्थान के प्रयासों से महिलाओं को रोजगार के अवसर मिले हैं और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करने में मदद मिली है।

कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल के जूट एवं हस्तशिल्प क्षेत्र को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई। इस क्षेत्र से जुड़े कारीगरों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और छोटे उद्यमियों के लिए विशेष क्लस्टर, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस तथा बेहतर विपणन सुविधाएं विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। इस मौके पर विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली कई महिलाओं को विशेष श्रेणियों में सम्मानित किया गया। स्वागत भाषण निनफेट की वैज्ञानिक डॉ. मनीष जगदाले ने दिया। निनफेट के टोट डिविजन से जुड़े डॉ. एल.के. नायक भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे। अतिथियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापन जयिता चौधरी ने किया। कार्यक्रम के माध्यम से महिला किसानों के योगदान को पहचान देने, उनके कौशल विकास को प्रोत्साहित करने और कृषि क्षेत्र में उनकी भागीदारी को और मजबूत बनाने का संदेश दिया गया।

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