केंद्र ने बंगाल का कितना पैसा रोका? तृणमूल ने मांगा 'श्वेतपत्र'

बजट बहस में पार्टी ने खोला फंड मोर्चा
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कोलकाता : विधानसभा के बजट अधिवेशन में तृणमूल कांग्रेस (ममता गुट) ने केंद्र-राज्य वित्तीय संबंधों का मुद्दा जोरदार ढंग से उठाते हुए केंद्र पर राज्य के प्राप्य फंड रोके जाने का आरोप लगाते हुए राज्य सरकार से श्वेतपत्र जारी करने की मांग की।

बेलियाघाटा के विधायक कुणाल घोष ने कहा कि 2021 से 2026 के बीच केंद्र से राज्य को किस मद में कितनी राशि मिलनी थी, कितनी जारी हुई और कितनी अब भी बकाया है, इसका पूरा ब्योरा जनता के सामने रखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि बकाया ऋण चुकाने के मामले में ममता बनर्जी सरकार ने सफल भूमिका निभाई है, इसलिए अब राज्य की वित्तीय स्थिति और केंद्र से लंबित राशि पर पारदर्शिता जरूरी है।

बजट बहस में भाग लेते हुए कुणाल ने साफ कहा कि उनका उद्देश्य केवल विरोध नहीं, बल्कि राज्य के समग्र विकास के लिए रचनात्मक सुझाव देना है। हालांकि उनके भाषण का केंद्र बिंदु केंद्र से बकाया फंड और राज्य की वित्तीय जरूरतों का सवाल ही रहा। उन्होंने जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए बजटीय आवंटन स्पष्ट करने और लाभार्थियों की संख्या कम नहीं करने की जरूरत पर जोर दिया।

अन्नपूर्णा योजना और आयुष्मान परियोजना की पात्रता शर्तों को भी साफ करने की मांग की। कुणाल घोष ने सिविक वॉलेंटियरों के वेतन में वृद्धि के फैसले, अवकाशप्राप्त पत्रकारों को पेंशन, मातंगिनी हाजरा और रानी शिरोमणि के नाम पर महिला बटालियन गठन का स्वागत किया। साथ ही सुभाष सरोवर, टाकी बॉयज स्कूल, राममोहन लाइब्रेरी, होम्योपैथी व आयुर्वेदिक ढांचे के विकास, बाईपास किनारे कृषि भूमि व जलीय भूमि की जांच और अल्पसंख्यकों के लिए बजट में अधिक संवेदनशीलता की मांग भी की।

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