

कोलकाता : सरकारी अस्पताल में मोतियाबिंद की सर्जरी के बाद बाईं आंख की रोशनी गंवाने वाले एक व्यक्ति को कलकत्ता हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी है। अदालत ने राज्य सरकार को पीड़ित को 5 लाख रुपए का मुआवजा देने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने कहा कि अस्पताल की गैरजिम्मेदराना कार्रवाई के लिए राज्य सरकार की जवाबदेही बनती है और अच्छे स्वास्थ्य के साथ सम्मानजनक जीवन जीना भी जीवन के मौलिक अधिकार का हिस्सा है।
43 मरीजों की हुई थी सर्जरी, 22 को आईं दिक्कतें
मामला गार्डन रीच स्थित गार्डन रीच स्टेट जनरल और मटियाब्रुज सुपर-स्पेशलिटी अस्पताल का है। जानकारी के अनुसार पेशे से इलेक्ट्रीशियन और परिवार के अकेले कमाने वाले गोबिंद चंद्र देबनाथ की 28 जून 2024 को बाईं आंख में छोटे चीरे से मोतियाबिंद की सर्जरी हुई थी।
सर्जरी के बाद देबनाथ की बाईं आंख की रोशनी चली गई। उनके साथ कुल 43 लोगों की सर्जरी हुई, जिनमें 22 मरीजों को ऑपरेशन के बाद जटिलताओं का सामना करना पड़ा।
हाईकोर्ट में पहले हुई सुनवाई के दौरान क्षेत्रीय नेत्र विज्ञान संस्थान, कोलकाता के निदेशक ने कथित तौर पर बताया था कि घटना की वजह ऑपरेशन में इस्तेमाल उपकरणों की प्रक्रिया में खामी हो सकती है। सिंगल बेंच ने पीड़ित को मुआवजे के लिए उचित मंच का रुख करने को कहा था। इसके खिलाफ अपील पर डिवीजन बेंच ने मामले को अलग नजरिए से देखा।
अदालत ने कहा कि आंखों की रोशनी चले जाने से व्यक्ति के जीवन की गुणवत्ता प्रभावित हुई है। कोर्ट के मुताबिक, मौलिक अधिकार के उल्लंघन की स्थिति में सार्वजनिक कानून के तहत मुआवजा दिया जा सकता है और अस्पताल की कार्रवाई के लिए राज्य की जिम्मेदारी बनती है।
अदालत ने यह भी माना कि गरीब मरीजों पर इस तरह सर्जरी करने में बरती गई लापरवाही गंभीर है।