

चीफ जस्टिस के डिवीजन बेंच का आदेश
जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : हाई कोर्ट ने अवैध रूप से बनाई गई बिल्डिंगों की जांच सीबीआई को सौंप दी है। चीफ जस्टिस रविंद्र वी घोगे और जस्टिस तपव्रत चक्रवर्ती के डिवीजन बेंच ने शुक्रवार को यह आदेश दिया। कोलकाता नगर निगम की तरफ से इस मामले में रिपोर्ट दाखिल करने का मौका देने की अपील की गई। चीफ जस्टिस ने इसे खारिज करते हुए कहा कि आयुक्त क्या कर रही हैं। क्या इसे देखना उनकी जिम्मेदारी नहीं है। इस दिशा में राज्य सरकार और नगर निगम को पहल करनी चाहिए थी। अब तक क्यों नहीं की गई।
इस बाबत दायर पेटीशन में कहा गया है कि बेलियाघाटा, राजा बाजार और कैनल ईस्ट रोड पर इस तरह की करीब 45 अवैध बिल्डिंग बनाई गई है। ये सारे अवैध निर्माण है और किसी की भी नगर निगम से मंजूरी नहीं ली गई है। पिटीशन में सवाल किया गया है कि इसे फंडिंग कहां से किया गया है। क्या यह ब्लैक मनी को व्हाइट मनी में कन्वर्ट करने का प्रयास है। डिवीजन बेंच ने सीबीआई को आदेश दिया है कि इसके लिए आवश्यकता के अनुसार स्पेशल इन्वेस्टिगेटिंग टीम का गठन किया जाए। कई मामलों में हाईकोर्ट ने अवैध निर्माण को गिराने का आदेश दिया था पर इस पर अमल नहीं हो पाया। इस तरह के अवैध निर्माण में कई हजार करोड रुपए का निवेश किया गया है। चीफ जस्टिस का सवाल था कि अवैध निर्माण को नगर निगम क्यों नहीं तोड़ पाता है। नगर निगम की तरफ से विस्तारित रिपोर्ट देने की अपील पर चीफ जस्टिस ने कहा कि यह और कुछ नहीं समय को नष्ट करने का एक तरीका है। चीफ जस्टिस ने कहा की जरूरत पड़ेगी तो हम कमिश्नर को तलब करेंगे। उन्हें काम करने के लिए वेतन मिलता है। इस पिटीशन में यह भी कहा गया है कि बहुत से अवैध निर्माण के मालिक के बारे में खबर ही नहीं है। किसने उनका निर्माण कराया, किसने उनकी बिक्री की इसकी कोई जानकारी नहीं है। इस पिटीशन में नगर निगम की भूमिका की जांच करने की अपील की गई है। डिवीजन बेंच ने पुलिस और नगर निगम के पास जो भी साक्ष्य उपलब्ध है उन्हें सीबीआई को सौंपे जाने का आदेश दिया है।