

जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता कोलकाता : एक बेटी ने हाई कोर्ट में बयान दिया है कि अपने पिता से मिलने में उसकी कोई दिलचस्पी नहीं है। वह अपने पिता से नहीं मिलना चाहती है। पिता ने बेटी को अस्थाई हिफाजत में देने के लिए हाई कोर्ट में पिटीशन दायर किया था। जस्टिस रिशाद मेदोरा ने अपने आदेश में कहा है कि बेटी नहीं मिलना चाहती है यह सही है, पर पिता से उसके मिलने के अधिकार को कैसे छीन सकते हैं। एडवोकेट अमृता पांडे ने बताया कि हाई कोर्ट ने बेटी को पिता के अस्थाई हिफाजत में देने से इनकार कर दिया। पर पिता को बेटी से मिलने की अनुमति दी है। जस्टिस मेदोरा ने आदेश दिया है कि पिता और बेटी की मुलाकात दो चार और छह नवंबर को होगी। यह मुलाकात वेस्ट बंगाल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी के दफ्तर में होगी। मां बेटी को लेकर आ जाएगी और पिता उससे बारह बजे से लेकर चार बजे तक मुलाकात कर सकते हैं। इस मौके पर बेटी के दादा-दादी भी मौजूद रह सकते हैं। जस्टिस मेदोरा ने आदेश दिया है कि इस मौके पर कोई अवांछित घटना नहीं घटनी चाहिए और दोनों पक्ष शांति और सद्भावना बनाए रखें। इसके साथ ही सदस्य सचिव को आदेश दिया है कि इस मौके पर एक वरिष्ठ अफसर की मौजूदगी सुनिश्चित की जाए। यहां उल्लेखनीय है कि पिता ने अलीपुर के जिला एवं सेशन जज के कोर्ट में बेटी की अस्थाई हिफाजत के लिए मामला दायर किया था। जज ने बेटी से बातचीत के बाद मामले को खारिज कर दिया। जज ने बेटी से बात की थी और बेटी ने पिता के साथ रहने से स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया था। यह कहानी मौजूदा दौर में घर-घर की है। पति और पत्नी की तकरार की कीमत बच्चों को चुकानी पड़ती है।