

जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता कोलकाता : आरजीकर के तत्कालीन प्रिंसिपल संदीप घोष के सहयोगी सुमन हाजरा को हाई कोर्ट से जमानत मिल गई। जस्टिस तीर्थंकर घोष ने शुक्रवार को मामले की सुनवाई के बाद यह आदेश दिया। इसके साथ ही आदेश दिया है कि सुमन हजरा कोलकाता मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र और उत्तर 24 परगना जिला से बाहर नहीं जा सकते हैं। जस्टिस घोष ने आदेश दिया है कि सुमन हाजरा को दस-दस हजार रुपए के दो बॉन्ड भरने पड़ेंगे और इतनी ही राशि की लोकल सियोरिटी देनी पड़ेगी। इसके साथ ही आदेश दिया है कि जेल से रिहा किए जाने से पहले उन्हें अपना पासपोर्ट अलीपुर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास जमा करना पड़ेगा। मामले की सुनवाई के दौरान प्रत्येक तारीख को कोर्ट में हाजिर होना पड़ेगा। शुक्रवार को मामले की सुनवाई के दौरान सीबीआई की तरफ से जमानत दी जाने का विरोध नहीं किया गया। सुमन हाजरा के एडवोकेट सब्यसाची बैनर्जी की दलील थी कि इस मामले में मुख्य अभियुक्त संदीप घोष को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई है। सुमन हाजरा दो साल से भी अधिक समय से जेल में है इसलिए उसे रिहा किया जाए। आरजीकर के तत्कालीन प्रिंसिपल संदीप घोष को आर्थिक घोटाले के मामले में सीबीआई ने गिरफ्तार किया था। सीबीआई के मुताबिक सुमन हाजरा इस मामले में संदीप घोष के प्रमुख सहयोगी थे। आरोप है कि संदीप घोष प्रत्येक वेंडर से कट मनी के रूप में दस फीसदी रकम लिया करते थे। सुमन हाजरा इस मामले में बिचौलिए की भूमिका निभाते थे। संदीप घोष को सुप्रीम कोर्ट से जमानत इस आधार पर मिल गई थी कि इस मामले में सीबीआई ने निर्धारित अवधि के अंदर चार्जशीट दाखिल नहीं किया था।