

जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता कोलकाता : हाई कोर्ट के जस्टिस देवांशु बसाक और जस्टिस आर्यन दत्त के डिवीजन बेंच ने पति को पत्नी की नागरिकता साबित करने का मौका दिया है। पति को इस मामले में से जुड़े सारे दस्तावेज एफिडेविट के साथ दाखिल करना पड़ेगा। डिवीजन बेंच ने कोई अंतरिम आदेश नहीं दिया है। इसकी अगली सुनवाई 26 नवंबर को होगी। पेटीशनर की पत्नी को बांग्लादेश भेज दिया गया है। पिटीशन के मुताबिक उत्तर 24 परगना के स्वरूप नगर की रहने वाली शहीदा फकीर को जबरन बांग्लादेश भेज दिए गया है। उसके पति जुम्मन फकीर ने हाई कोर्ट में हेबियस कार्पस दायर किया है। पिटीशन के मुताबिक वे दोनों प्रवासी मजदूर है और मुंबई में रहकर काम करते हैं। एक दिन शहीदा बाजार में सरोसामान खरीदने गई थी इसी दौरान पुलिस ने उसे पकड़ लिया और बांग्लादेशी बताते हुए गिरफ्तार कर लिया। इस बाबत कोई जांच पड़ताल भी नहीं की गई और 23 जुलाई को उसे बांग्लादेश की सीमा के अंदर धकेल दिया गया। मुंबई में कोई मदद नहीं मिलने पर जुम्मन शेख ने हाई कोर्ट ने मामला दायर किया है। पिटीशन के मुताबिक शहीदा के माता-पिता का नाम 2002 के वोटर लिस्ट में था। एसआईआर प्रक्रिया के दौरान उसका नाम काट दिया गया। उसने ट्रिब्यूनल में अपील दायर कर रखा है और अभी तक इसकी सुनवाई नहीं हो पाई है। उसके एडवोकेट ने कोर्ट में पैरवी करते हुए कहा कि शहीदा के दादा और दादी का नाम 1952 और 1971 के वोटर लिस्ट में भी था। उसके पास संपत्ति भी है और एफिडेविट के साथ इसका सुबूत पेश करेगा। केंद्र को भी इस मामले में एफिडेविट दर्शन करने का आदेश दिया है।