केएमसी चुनाव की दिशा में आज तक कोई पहल नहीं ft

परिसीमन की अधिसूचना को दी है चुनौती hu
Kolkata
‘म्यूल अकाउंट’ के आरोप पर बैंक खाते फ्रीज नहीं कर सकते
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जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता  कोलकाता : कोलकाता नगर निगम के चुनाव की दिशा में बृहस्पतिवार तक कोई भी पहल की जाने पर हाई कोर्ट ने रोक लगा दी है। जस्टिस हिरणमय भट्टाचार्य ने बुधवार को मामले की सुनवाई के बाद मौखिक आदेश दिया तो एडवोकेट जनरल ने इस पर अपनी सहमति जता दी। बुधवार को सुबह जस्टिस हिरणमय भट्टाचार्य के कोर्ट में इसे मेंशन किया गया तो उन्होंने तीन बजे सुनवाई की जाने का आदेश दिया था। कोलकाता नगर निगम के चुनाव के सिलसिले में कराए गए परिसीमन को चुनौती दी गई है। जस्टिस भट्टाचार्य ने सवाल किया कि इस मामले कि ऐसी क्या अर्जेंसी है कि वेकेशन बेंच में इसकी सुनवाई की जाए। इसकी जवाब में एडवोकेट विकास रंजन भट्टाचार्य ने कहा कि अगर कल चुनाव की अधिसूचना जारी कर दी जाती है तो उनका मामला इंफक्शस हो जाएगा। इसलिए इसकी सुनवाई की अर्जेंसी है। एडवोकेट भट्टाचार्य की दलील थी कि परिसीमन एक नीतिगत मामला है और सभी को विश्वास में लेकर इस पर फैसला लिया जाना चाहिए। इसमें सत्तारूढ़ दल के हित को देखते हुए एक तरफा फैसला लिया गया है और वार्डों की संख्या 144 से बढ़ा कर 209 कर दी गई है। परिसीमन के बाद जिन वार्डों का गठन किया गया है उनमें भी मतदाताओं की लिहाज से समरूपता नहीं है. कहीं पांच हजार मतदाता है तो कहीं 12 हजार है। उनका आरोप था कि पिछले विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ दल को किस वार्ड में कितने वोट मिले हैं उसी को आधार बनाते हुए परिसीमन किया गया है। राज्य सरकार की तरफ से बहस करते हुए एडवोकेट जनरल की दलील थी कि यह एक जनहित याचिका नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि पेटीशनर का हित कैसे प्रभावित हुआ है। उसका लोकश स्टैंडी  क्या है। सभी की सहमति से शेड्यूल का प्रकाशन किया गया और आपत्ति दर्ज करने का मौका भी दिया गया। पेटीशनर की पार्टी ने आपत्ति नहीं जताई थी। जस्टिस भट्टाचार्य  ने सवाल किया कि क्या शुरुआती दौर में आपत्ति दर्ज करने का मौका दिया गया था। एडवोकेट जनरल ने कहा कि वे चाहे तो इलेक्शन पिटिशन दायर कर सकते हैं।

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