बेटा ब्लड कैंसर का मरीज, मां की नौकरी बचाने की जद्दोजहद 

जस्टिस सिन्हा ने सुन ली उसकी विनती अफसरों के पास सुनने को नहीं होता है दिल
Kolkata
SIR की अर्जेंट सुनवाई से हाईकोर्ट का इनकार
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जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता  कोलकाता : एक महिला टीचर का बेटा ब्लड कैंसर का मरीज है। उसकी उम्र पांच साल के करीब है। एक तरफ बीमार बेटे के इलाज का सवाल है तो दूसरी तरफ मां के सामने अपनी नौकरी को बचाए रखने की जद्दोजहद भी है। एक साल से वह घर के निकट किसी स्कूल में तबादला किए जाने की अपील कर रही थी। पर अफसर के पास सुनाने को दिल कहां होता है।जब उन्होंने नहीं सुना तो उसने हाई कोर्ट में मामला दायर कर दिया। शुक्रवार को जस्टिस अमृता सिन्हा के बेंच में मामले की सुनवाई के दौरान स्कूल कमिश्नर और राज्य सरकार की तरफ से कहा गया कि इस टीचर के लिए कोई मैचिंग वैकेंसी नहीं मिल पाई है। जस्टिस सिन्हा ने आदेश दिया है कि चार सप्ताह के अंदर पेटीशनर रम्पा भौमिक के प्रतिवेदन को सुना जाए। वैकेंसी चिन्हित करने के बाद उसे उस स्कूल में पोस्टिंग दी जाए। इसके साथ ही अफसरो से कहा है कि वह इस मामले की अहमियत को समझते हुए शीघ्र फैसला लें। एडवोकेट समीउल बारी ने बताया कि फिलहाल वह खड़गपुर के पास रानी माटी रतन चांदी हाई स्कूल में पढ़ा रही है। उसका घर पूर्व मिदनापुर के महीसादल थाना क्षेत्र के अंतर्गत है। उसे अपने बेटे को प्रत्येक तीन माह के अंतराल पर मुंबई के टाटा कैंसर हॉस्पिटल में ले जाना पड़ता है। इसके अलावा उसे बेटे को प्रतिदिन लो कीमोथैरेपी देनी पड़ती है। सप्ताह के अंतिम दिन उसे स्पेशल कीमोथेरेपी देनी पड़ती है। उसकी बस इतनी भर अपील थी कि अगर उसका तबादला उसके घर के पास किसी स्कूल में कर दिया जाए तो वह बच्चे की देखभाल कर पाएगी। बेटा कैंसर का मरीज है और वह इस आस पर जिंदा है कि एक दिन बेटा स्वस्थ हो जाएगा।

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