बांग्लादेश भेजे जाने पर हाई कोर्ट ने लगाया स्टे

क्या लोगों के बयान भर से तय होती है नागरिकता
बांग्लादेश भेजे जाने पर हाई कोर्ट ने लगाया स्टे
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  जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता  कोलकाता : एक व्यक्ति को बांग्लादेश भेजे जाने पर हाई कोर्ट ने स्टे लगा दिया है। जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने बृहस्पतिवार को मामले की सुनवाई के बाद यह आदेश दिया। उन्होंने कहा कि जस्टिस कृष्णा राव के कोर्ट में 14 अक्टूबर को इस मामले की सुनवाई होगी। कोर्ट के आदेश के बाद ही इस मामले में अगला कदम उठाए जा सकता है।  पेटीशनर की तरफ से बहस करते हुए एडवोकेट ने कहा कि फॉरेन रजिस्ट्रेशन ऑफिस ने बांग्लादेश भेजे जाने का आदेश दिया है। उन्होंने कहा कि वह भी तब जब इस मामले की सुनवाई चल रही है। राज्य सरकार की तरफ से कहा गया कि पेटीशनर को फौरन रजिस्ट्रेशन ऑफिस में आवेदन करने का आदेश दिया जाए। कोर्ट में इससे इनकार करते हुए कहा कि उसे तो पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इसके बाद राज्य सरकार की तरफ से जस्टिस भट्टाचार्य के कोर्ट के न्यायिक अधिकार क्षेत्र का हवाला देते हुए कहा गया कि इस तरह के मामलों की सुनवाई जस्टिस कृष्णा राव की कोर्ट में हो रही है। डिटरमिनेशन उन्हीं के पास है। जस्टिस भट्टाचार्य ने सवाल किया कि आठ अगस्त से उसे मुर्शिदाबाद के डिटेंशन सेंटर में रखा गया है। राज्य सरकार की दलील थी कि उसके परिवार के लोगों ने उसके बांग्लादेशी होने का बयान दिया है। एडिशनल एडवोकेट जनरल ने कहा कि उसने फर्जी पैन कार्ड आधार कार्ड और वोटर कार्ड बनवाया है। जस्टिस भट्टाचार्य ने सवाल किया कि क्या किसी भी परिवार के लोगों के बयान के आधार पर ही किसी की नागरिकता तय हो जाती है। जस्टिस भट्टाचार्य ने एडिशनल एडवोकेट जनरल से सवाल किया कि क्या आपको पता है 70 में उस पार से कितने लोग आए थे। क्या सभी को वापस बांग्लादेश भेजा जाना संभव है।

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