मृत कैदियों के वारिसों को दिया जाए मुआवजा : हाई कोर्ट 

उनकी पहचान को लेकर उलझा है सवाल 
हाई कोर्ट की फाइल फोटो
हाई कोर्ट की फाइल फोटो
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जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता  कोलकाता : जेल में अस्वाभाविक रूप से मरने वाले कैदियों के वारिसों को मुआवजा दिया जाए। हाई कोर्ट के जस्टिस देवांशु बसाक और जस्टिस आर्यक दत्त के डिवीजन बेंच ने यह आदेश दिया है।डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार को आदेश दिया है की 2022 की जनवरी से लेकर आज की तारीख जेल में बंद जिन कैदियों की इस तरह मौत हुई है उनकी सूची दी जाए। स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी की तरफ से बहस कर रहे एडवोकेट ने कोर्ट को जानकारी दी कि इस तरह के एक फंड का सृजन किया गया है। राज्य सरकार ने 2019 में 29 नवंबर को इस बाबत एक अधिसूचना जारी की थी। इस योजना के तहत आईजी जेल मुआवजे का वितरण करेंगे। पर राज्य सरकार जेल में बंद जिन कैदियों की अस्वाभाविक मौत हुई है उनके वारिसों को मुआवजा नहीं दे पा रही है। इसकी वजह यह है कि उनकी बारिसो की पहचान नहीं हो पा रही है। डिवीजन बेंच ने स्टेट लीगल सर्विसेज के सदस्य सचिव से इस दिशा में पहल करने का अनुरोध किया है। इसके साथ ही जिला स्तर पर लीगल सर्विसेज अथॉरिटी को आदेश दिया है कि जेल में बंद रहने के दौरान जिन कैदियों की अस्वभाविक मौत हुई है उनके वारिसों की तलाश की जाए। डिवीजन बेंच ने एसअलएसए के सदस्य सचिव को आदेश दिया है कि उनके पास जो भी डाटा उपलब्ध है उसे आईजी जेल को उपलब्ध करा दें। कोर्ट बंधु एडवोकेट तापस भांज ने अनुरोध किया कि इस सिलसिले में दायर तीन मामलों को अलग कर दिया जाए। डिवीजन बेंच ने इनकार करते हुए कहा कि इससे भरम की स्थिति पैदा होगी और एक ही बात का बार-बार रिपीटेशन होगा।

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