मिलन की अंतरिम जमानत के खिलाफ राज्य सुप्रीम कोर्ट में 

चीफ जस्टिस के बेंच में सुनवाई सोमवार को
सुप्रीम कोर्ट
शादी के बाद भी महिला की अपनी पहचान स्वतंत्रता खत्म नहीं होती : सुप्रीम कोर्टसांकेतिक चित्र
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  जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता  कोलकाता : नंदीग्राम विधानसभा केंद्र के उपचुनाव में मिलन प्रधान को मिली अंतरिम जमानत के खिलाफ राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की है। हाई कोर्ट के जस्टिस तीर्थंकर घोष ने मिलन प्रधान को 21 अक्टूबर तक के लिए अंतरिम जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। इसे चुनौती देते हुए एसएलपी दायर की गई है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने सोमवार को मामले की सुनवाई की जाने का आदेश दिया।  राज्य सरकार की तरफ से बहस करते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बृहस्पतिवार को ही मामले की सुनवाई की जाने की अपील की। पर चीफ जस्टिस के बेंच ने इससे इनकार कर दिया। इधर इस मामले में मिलन प्रधान की तरफ से कांग्रेस ने छह कैबियट दायर किया है। यानी उनका पक्ष सुने बगैर सुप्रीम कोर्ट इस मामले में कोई एक तरफ आदेश नहीं दे। सॉलिसिटर जनरल ने दलील देते हुए कहा कि अभियुक्त के खिलाफ हत्या के पांच मामले दर्ज हैं। ऐसे में सिर्फ चुनाव लड़ने के लिए उसे अंतरिम जमानत कैसे दी जा सकती है। उन्होंने सवाल किया कि क्या हत्या के मामले में अभियुक्त को विशेष सुविधा किस तरह दी जा सकती जो कि आम अभियुक्त को नहीं मिलती है।

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