

जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता कोलकाता : तृणमूल कांग्रेस के नाम और सिंबल पर चार सप्ताह के अंदर सुनवाई पूरी करें। इस दौरान दोनों पक्षों का बयान सुनने के साथ ही दस्तावेज आदि का भी निरीक्षण करना पड़ेगा। इसके बाद तीन माह के अंदर अपना फैसला सुनाना पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत के बेंच ने सोमवार को मामले की सुनवाई के बाद यह आदेश दिया। विधानसभा चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस में विभाजन हो गया। रितव्रत बनर्जी के नेतृत्व में कुछ विधायकों ने एक अलग गुट बना लिया है। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के नाम सिंबल और फंड पर दावा किया है। यह मामला निर्वाचन आयोग के पास लंबित है। निर्वाचन आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के नाम और सिंबल को फ्रीज कर दिया है। दोनों ही गुटों को अलग-अलग नाम और सिंबल दे दिए गए हैं। तृणमूल कांग्रेस की तरफ से बहस कर रहे सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने मामले की सुनवाई शीघ्र की जाने की अपील की। इसके बाद ही चीफ जस्टिस के बेंच ने उपरोक्त आदेश दिया। चार सप्ताह के समय के मामले में एडवोकेट सिब्बल सहमत हो गए। रीताब्रत गुट की तरफ से पैरवी कर रहे एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने समय को बढ़ा कर छह सप्ताह किए जाने की अपील की पर चीफ जस्टिस इससे सहमत नहीं हो पाए