

जी जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता कोलकाता : लिफाफा सिंबल को लेकर दायर मामले की सुनवाई सोमवार को समाप्त हो गई। जस्टिस कृष्णा राव ने सुनवाई के बाद फैसले को रिजर्व कर लिया। रेजीनगर विधानसभा के उप चुनाव के सिलसिले में आईएसएफ की तरफ से यह पिटीशन दायर किया गया है। यह सिंबल डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार को दे दिया गया है। मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस राव ने कई तीखे सवालों का जवाब मांगा। जस्टिस राव ने सवाल किया कि सिंबल को लेकर चुनाव आयोग की तरफ से अधिसूचना कब जारी की गई थी। चुनाव आयोग की तरफ से बहस कर रहे एडवोकेट जीष्णु चौधरी ने इंस्ट्रक्शन लेने के बाद कहा कि ऐसी कोई अधिसूचना जारी नहीं की गई है। जस्टिस राव ने सवाल किया कि क्यों नहीं जारी की गई। जस्टिस राव ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर चुनाव आयोग राजनीतिक दलों के निर्देश पर काम करेगा तो कोर्ट हताश हो जाएगा। जस्टिस राव ने सवाल किया कि चुनाव अधिकारी की जिम्मेदारी किया है। उन्होंने कहा कि वह मामले की सुनवाई से ही यह सवाल करते आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले से ही इस सिंबल का इस्तेमाल करते आ रहे राजनीतिक दल के उम्मीदवार को यह सिंबल क्यों नहीं दिया गया। जस्टिस राव ने कहा कि चुनाव आयोग को विवादास्पद की स्थिति से बचना चाहिए। जस्टिस राव ने सवाल किया कि अगर एक ही सिंबल के लिए दो राजनीतिक दल दावा करते हैं तो चुनाव आयोग की जिम्मेदारी क्या बनती है। एडवोकेट चौधरी ने कहा कि सिंबल किसी की संपत्ति नहीं है। जस्टिस राव ने कहा कि आप मुझे वह प्रावधान दिखाइए जिसके तहत यह सिंबल दूसरे राजनीतिक दल को दिया गया है। एडवोकेट विकास रंजन भट्टाचार्य ने कहा क्या चुनाव आयोग मानता है यह उपचुनाव पिछले विधानसभा चुनाव से अलग है। उन्होंने कहा कि यह उपचुनाव उसी प्रक्रिया का एक हिस्सा है और चुनाव आयोग ने गलत फैसला लिया है।