स्कूल तक जाने को सड़क नहीं, चीफ जस्टिस का बेंच हैरान 

वरीयता के आधार पर सुनवाई 28 को दिया एफिडेविट दाखिल करने का आदेश 
स्कूल तक जाने को सड़क नहीं, चीफ जस्टिस का बेंच हैरान 
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जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता 

 कोलकाता : दो स्कूलों के बच्चों के लिए स्कूल जाना एक दूभर कार्य बन गया है। स्कूल तक जाने के लिए संपर्क मार्ग नहीं है। जो है वह कीचड़ मिट्टी से भरा रहता है। इतना ही नहीं एक स्कूल के बच्चों को मिड डे मील लेने के लिए इस कीचड़ से सने मार्ग से होते हुए दो बार आना जाना पड़ता है। शिक्षा के इस हाल को देखकर चीफ जस्टिस रविंद्र वी घुगे का बेंच हैरान रह गया है।

चीफ जस्टिस ने राज्य सरकार को दो सप्ताह के अंदर हालात का एक स्पष्ट खाका पेश करने को कहा है। इसे एफिडेविट की शक्ल में पेश करना पड़ेगा। जवाबी एफिडेविट 24 सितंबर से पहले दाखिल करना पड़ेगा। चीफ जस्टिस ने आदेश दिया है कि इस मामले की अर्जेंट मोशन कैटेगरी के रूप में 28 सितंबर को सुनवाई की जाएगी। एडवोकेट घनश्याम पांडे ने यह जानकारी देते हुए बताया कि रविंद्र नाथ साह ने यह पीआईएल दायर की है। चीफ जस्टिस ने पेटीशनर को आदेश दिया है वह स्कूलों को जाने वाले पहुंच मार्ग का एक नक्शा भी बनाएं। इसके साथ ही पक्की सड़क का नक्शा भी बनाना पड़ेगा। पक्की सड़क से स्कूल की दूरी कितनी है इसका ब्यौरा देना पड़ेगा। चीफ जस्टिस ने आदेश दिया है कि जिला पंचायत और ग्रामीण विकास अधिकारी को इस मामले में पार्टी बनाया जाए। ये दोनों स्कूल दक्षिण 24 परगना में स्थित है। उनके नाम है बालेश्वरपुर आरडीबीपीएम स्कूल और रोजा दोगोच्छा एफ पी स्कूल। सबसे ज्यादा हैरानी की बात तो यह है स्कूल के बच्चों को मिड डे मील लेने के लिए इस कीचड़ से सने रास्ते से  दो बार आना जाना पड़ता है।

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