

जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : नॉन जुडिसियल स्टांप पेपर पर दस्तखत करके ब्याह रचाने से ब्याह वैध नहीं हो जाता है। हाई कोर्ट के जस्टिस उदय कुमार ने एक मामले में यह फैसला सुनाया है। पीटिशनर के खिलाफ बहु विवाह का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज करायी गई थी। इसके बाद अदालत में आपराधिक मुकदमा कायम किया गया था। पीटिशनर ने इसे खारिज करने के लिए अपील दायर की थी। जस्टिस कुमार ने मामले की सुनवायी के बाद मुकदमा खारिज करने का आदेश दिया है।
एडवोकेट अमृता पांडे ने यह जानकारी देते हुए बताया कि दीप दे ने यह पीटिशन दायर किया था। जस्टिस कुमार ने अपने फैसले में कहा है कि स्टांप पेपर पर दस्तखत करके रचाया गया ब्याह हिंदू मैरिज एक्ट के तहत वैध नहीं है। हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 5 और 7 के तहत वैध विवाह के लिए कुछ शर्तें तय कर दी गई हैं। इसे सामाजिक परंपराओं का पालन करते हुए रचाया जाता है। इसमें अग्नि की वेदी के सामने सात बार फेरा लिया जाता है और सातवां फेरा संपन्न होने के बाद ही ब्याह वैध हो जाता है। हिंदू मैरिज एक्ट में स्टांप पेपर पर दस्तखत करके रचाए गए ब्याह को मान्यता दिए जाने का कोई प्रावधान नहीं है। इसके साथ ही कहा है कि इस मामले में पीटिशनर के खिलाफ 498ए के तहत कोई मुकदमा नहीं बनता है। क्योंकि वह वैधानिक रूप से पति ही नहीं है। जस्टिस कुमार ने कहा है कि कोर्ट वैवाहिक मामलों में महिलाओं को दिए गए सुरक्षा के प्रति सजग है पर यहां यह अतिसयोक्ति हो जाएगी। जस्टिस कुमार ने अपने फैसले में कहा है कि आईपीसी की धारा 494 के तहत पति के खिलाफ मामला दायर करने के लिए पहले विवाह का ठोस प्रमाण पेश करना पड़ता है। बगैर वैध विवाह के किसी को पति का दर्जा नहीं दे सकते हैं। यहां जब पीटिशनर पति ही नहीं है तो मुकदमा किस आधार पर कायम किया जा सकता है।