डकैती के एक मामले में 38 साल बाद अपील खारिज

हाई कोर्ट ने सुनाया फैसला किया दखल देने से इनकार
डकैती के एक मामले में 38 साल बाद अपील खारिज
Published on

जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : डकैती के एक मामले में दायर अपील को हाई कोर्ट ने करीब 38 साल बाद खारिज कर दिया। पीड़ितों की तरफ से यह अपील दायर की गई थी। डकैती के एक मामले में पुरुलिया के एडिशनल सेशन जज ने अभियुक्तों को बरी कर दिया था। इसके खिलाफ यह अपील दायर की गई थी। जस्टिस अनन्या बंद्योपाध्याय ने मामले की सुनवायी के बाद एडिशनल सेशन जज के फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया।

एडवोकेट घनश्याम पांडे ने बताया कि 1982 में 31 जुलाई को रात आठ बजे के करीब चार अभियुक्तों ने डाका डाला था और हथियार की नोक पर नकदी और सरोसामान लूट लिया था। झालदा थाने में एफआईआर दर्ज करायी गई थी। पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर दी, पर एडिशनल सेशन जज ने चारों अभियुक्तों को बरी कर दिया। इसके खिलाफ यह अपील दायर की गई थी। जस्टिस बंद्योपाध्याय ने अपने फैसले में कहा है कि ट्रायल कोर्ट का यह आकलन सही है कि प्रोसिक्यूशन इस मामले को साबित करने में नाकाम रहा है। पुलिस ने इस मामले में चोरी की गई एक घड़ी को जब्त किया था। पर पुलिस इसके मालिक को तलाश नहीं कर पायी। यह घटना जुलाई में घटी थी। पुलिस ने इसके एक चश्मदीद गवाह का बयान सात माह बाद रिकार्ड किया था। पर ट्रायल कोर्ट में बयान देते समय वे बहुत सी बातें भूल गए थे। जस्टिस बंद्योपाध्याय ने अपने फैसले में कहा है कि जहां तक पहचान का सवाल है प्रोसिक्यूशन इस मामले में बुरी तरह नाकाम रहा है। उपरोक्त तथ्यों के साथ साथ करीब 38 साल बाद इस मामले का निपटारा करते समय कोर्ट एडिशनल सेशन जज के फैसले में दखल देने के पक्ष में नहीं है। लिहाजा यह अपील खारिज की जाती है। आदेश की कापी ट्रायल कोर्ट के पास तत्काल कार्रवाई के लिए भेज दी जाए।


संबंधित समाचार

No stories found.

कोलकाता सिटी

No stories found.

खेल

No stories found.
logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in