बेलडांगा मामले की एनआईए जांच पर स्टे नहीं

खारिज की राज्य सरकार की अपील
बेलडांगा मामले की एनआईए जांच पर स्टे नहीं
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जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : बेलडांगा में घटी हिंसक घटना की एनआईए जांच पर स्टे लगाने से हाई कोर्ट ने इनकार कर दिया। इसके साथ ही इस मामले की एनआईए कोर्ट में चल रही अदालती कार्यवाही भी जारी रहेगी। इस बाबत दायर राज्य सरकार की अपील को हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया। वृहस्पतिवार को लंबी सुनवायी के बाद चीफ जस्टिस सुजय पाल और जस्टिस पार्थ सारथी सेन के डिविजन बेंच ने यह आदेश दिया। इसके साथ ही कहा है कि इससे जुड़े इंटरलोक्युटरी एप्लिकेशन पर अगली सुनवायी 26 मार्च को होगी।

यहां गौरतलब है कि झारखंड में एक प्रवासी मजदूर की हत्या के बाद बेलडांगा में दो दिनों तक भयानक उपद्रव हुआ था। इस दौरान बम विस्फोट व आगजनी की घटनाएं घटी थी। इस दौरान ट्रेन भी रोकी गई थी। एनआईए के एडवोकेट अरुण माइती ने बताया कि इसकी एनआईए जांच के लिए चीफ जस्टिस के बेंच में पीआईएल दायर की गई थी। चीफ जस्टिस के बेंच के 20 जनवरी के आदेश के बाद केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने इसकी जांच एनआईए को सौंप दी थी। इसके खिलाफ राज्य सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने वापस इस मामले को चीफ जस्टिस के पास भेज दिया है। एनआईए की तरफ से एडिशनल सालिसिटर जनरल एस वी राजू ने पैरवी की। राज्य सरकार की तरफ से पैरवी कर रहे एडवोकेट कल्याण बनर्जी की दलील थी कि क्या इस मामले में यूएपीए की धारा की तहत मुकदमा कायम किया जा सकता है।. उनकी दलील थी कि एनआईए की जांच पर फिलहाल रोक लगाई जाए। जब तक हाई कोर्ट का आदेश नहीं आता है एनआईए कोर्ट कोई आदेश नहीं दे सकता है। कल्याण बनर्जी की दलील थी कि राज्य सरकार की रिपोर्ट के बाद गृह मंत्रालय एनआईए को जांच सौंपता है। इस पर जस्टिस पार्थ सारथी सेन ने टिप्पणी करते हुए कहा कि एनआईए एक्ट के तहत एनआईए भी स्वतंत्र रूप से जांच का फैसला ले सकता है। एनआईए की तरफ से पैरवी करते हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू की दलील थी कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक हम जांच कर सकते हैं और रिपोर्ट दाखिल कर सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने जांच पर रोक नहीं लगे लगाई है। हमारी जांच जारी है और यह राज्य की जिम्मेदारी बनती है कि वह हमें दस्तावेज सौंप दे। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का आदेश अभी लागू है. अगर दस्तावेज नहीं सौंपा जाता है तो इसका मतलब है की जांच में दखल दी जा रही है.


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