

जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : यह मामला सुप्रीम कोर्ट से मिले एक जख्म पर नौकरशाही का नमक छिड़कने के अंदाज का एक नमूना है। दागी नहीं होने के बावजूद सुप्रीम कोर्ट के फैसले के कारण एक अध्यापिका की नौकरी चली गई। पर सुप्रीम कोर्ट ने पुरानी नौकरी में वापस लौटने का रास्ता भी खुला रखा है। यह अध्यापिका भी अपनी पुरानी नौकरी में लौट जाना चाहती है, पर नौकरशाही ने इसे बेहद मुश्किल बना दिया है। उसने हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। जस्टिस अमृता सिन्हा ने बोर्ड से एक सवाल का जवाब मांगा है। इसके साथ ही इसकी सुनवायी को लंबे समय तक टालने से इनकार कर दिया।
अध्यापिका ने पुरानी नौकरी में लौटने के आवेदन के साथ ही दस स्कूलों का नाम दिया था। ये स्कूल उसके आवास के पास हैं। उसकी अपील थी कि इनमें से किसी एक में उसे वापस भेज दिया जाए। इसके बाद उसे एक ऐसे स्कूल में भेजा गया जो उसके आवास से 75 किलोमीटर दूर है। वहां जाने के लिए उसे सात बार बस, टोटो, ऑटो आदि बदलना पड़ता है। उसने हाई कोर्ट में दायर याचिका में कहा है कि वह बीमार है, उसकी छोटी सी बच्ची है और पति भी हार्ट के मरीज हो गए हैं। उसकी ज्वायनिंग उसके घर के पास के किसी स्कूल में करायी जाए। बोर्ड दलील थी कि उसने ज्वायन कर लिया है इसलिए इस पर विचार नहीं किया जा सकता है। उसके एडवोकेट की दलील थी कि ऐसे बहुत से मामले हैं जहां ज्वायनिंग के बाद भी ट्रांसफर किया गया है। जस्टिस सिन्हा ने आदेश दिया है कि वह सिंपल आवेदन देगी और उसकी ज्वायनिंग इन दस स्कूलों में से किसी एक में करायी जाए। फार्मेट की प्रक्रिया को पूरी करने में समय लग जाएगा। साथ ही बोर्ड से कहा है कि ज्वायनिंग के बाद दोबारा ट्रांसफर किए जाने का ब्यौरा दें। बोर्ड ने कहा कि अगली सुनवायी होली बाद की जाए तो जस्टिस सिन्हा ने कहा कि इतनी देर नहीं करेंगे। अगली सुनवायी 27 फरवरी को होगी।