

जितेंद्र सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : हाई कोर्ट के मामलों का पहाड़ लगा है पर जजों का संकट बरकरार है। हाई कोर्ट में जजों के कुल 72 स्वीकृत पद हैं, पर जजों की संख्या कुल 43 ही है।. इधर सुप्रीम कोर्ट ने जमानत और अग्रिम जमानत के मामलों की त्वरित सुनवाई करने की सलाह दी है। फिलहाल स्वीकृत पदों को पूरा करने का कोई आसार नजर नहीं आ रहा है.
यह गौरतलब है कि 2018 के पहले जजों के 52 पद स्वीकृत थे। अब यह संख्या बढ़कर 72 हो गई है, लेकिन 72 कभी रहे ही नहीं। जब 52 था तब 52 भी नहीं रहें थे। यानी जजों का संकट हर समय बरकरार रहा है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने सभी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के साथ एक बैठक की थी। सूत्रों के मुताबिक कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ने जजों के स्वीकृत पद पूरा नहीं होने का सवाल उठाया था। हाई कोर्ट के 72 स्वीकृत पदों में से 54 स्थायी हैं और 18 अतिरिक्त जज हैं। अतिरिक्त जज के पदों पर सेशन कोर्ट के जजों की पदोन्नति करके ही नियुक्ति की जाती है। एडवोकेटों को भी जज नियुक्त किए जाने की परंपरा है, लेकिन यह थम सी गई है। पिछले साल 17 एडवोकेटों के नाम जज के पद पर नियुक्ति के लिए भेजे गए थे। पर अभी लंबिद है। इधर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जमानत और अग्रिम जमानत के मामलों की सुनवाई त्वरित होनी चाहिए। सच तो यह है कि जमानत और अग्रिम जमानत के मामलों का हाई कोर्ट में अंबार लगा है। जजों के संकट के कारण यह स्थिति बनी है। हाई कोर्ट में जजों के संकट का सवाल हमेशा ही बना रहा है। यहां तक कि हाई कोर्ट के एडवोकेटों ने जजों की कमी के सवाल पर करीब ढाई माह तक नॉट तो अटेंड का आंदोलन भी किया था।