

मोटा कमीशन का लालच देकर कारोबारियों से करते थे संपर्क
6 महीने से हावड़ा के किराये के कमरे से संचालित हो रहा था अंतरराज्यीय गिरोह
दीपक, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : महानगर के प्रमुख व्यापारिक केंद्र बड़ाबाजार में हवाला और अंगड़िया कारोबार के जरिए होने वाले नकदी के लेन-देन को आधार बनाकर एक अंतरराज्यीय ठगी गिरोह पिछले छह महीने से अपना नेटवर्क चला रहा था। गिरोह के सदस्य कारोबारियों को 40 फीसदी तक कमीशन देने का लालच देकर उनसे संपर्क स्थापित करते थे और इसी कारोबारी नेटवर्क के माध्यम से विभिन्न राज्यों में ठगी की वारदातों को अंजाम देते थे। लाखों रुपये की असली नकदी के बदले कागज से भरी गड्डियां थमाकर आरोपी फरार हो जाते थे। बड़ाबाजार पुलिस ने इस गिरोह का पर्दाफाश करते हुए हावड़ा में उसके ठिकाने का पता लगाया है। प्रारंभिक जांच में एक करोड़ रुपये से अधिक की ठगी का खुलासा हुआ है।
हावड़ा में किराये के कमरे से चल रहा था पूरा नेटवर्क
पुलिस सूत्रों के अनुसार, गिरोह के सदस्य करीब छह महीने पहले कोलकाता पहुंचे थे। उन्होंने हावड़ा के गोलाबाड़ी थाना क्षेत्र के विजय मुखर्जी रोड पर एक कमरा किराये पर लिया था। इसी ठिकाने से ठगी की योजना बनाने और नकली नोटों जैसी गड्डियां तैयार करने का काम किया जाता था। गिरफ्तार आरोपी राजस्थान के चूरू, डीडवाना और नागौर इलाके के रहने वाले बताए जा रहे हैं। पुलिस अब इनके अन्य साथियों और विभिन्न राज्यों में फैले संपर्कों का पता लगाने में जुटी है।
40 फीसदी कमीशन का लालच देकर बनाते थे संपर्क
जांच में सामने आया है कि गिरोह मुख्य रूप से बड़ाबाजार के हवाला और अंगड़िया कारोबार से जुड़े लोगों को निशाना बनाता था। आरोपी भारी कमीशन का प्रस्ताव देकर कारोबारियों को अपने संपर्क में लाते थे। इसके बाद नकदी के लेन-देन के लिए अलग-अलग शहरों की पार्टियों से संपर्क स्थापित कर ठगी का जाल फैलाते थे। गिरोह के सदस्य दिल्ली, गुवाहाटी, मुंबई, अगरतला और भुवनेश्वर जैसे शहरों में जाकर विभिन्न पार्टियों से नकदी एकत्र करते थे। इसके बाद कोलकाता के कारोबारियों के साथ सौदा कर उन्हें असली रकम के बजाय कागज से भरी गड्डियां थमा देते थे।
असली नोटों के बीच कागज भरकर तैयार करते थे गड्डियां
हावड़ा स्थित किराये के कमरे से पुलिस को प्रिंटर, पेपर कटर, सफेद बॉन्ड पेपर, सेलोटेप मशीन, कैंची और स्याही के कारतूस समेत कई सामान मिले। इनका इस्तेमाल नकली नोटों जैसी गड्डियां तैयार करने में किया जाता था। आरोपियों की गड्डियों के ऊपर और नीचे 500 रुपये के असली नोट होते थे, जबकि बीच का अधिकांश हिस्सा कटे हुए सफेद कागज से भरा रहता था। इसके अलावा निजी बैंकों के नाम और लोगो वाले फर्जी लेबल भी लगाए जाते थे, ताकि बंडलों को पहली नजर में असली नकदी जैसा दिखाया जा सके।
एक करोड़ से अधिक की ठगी का खुलासा
पुलिस की प्रारंभिक जांच में गिरोह द्वारा अब तक एक करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की जाने की बात सामने आई है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क ने किन-किन शहरों में वारदातों को अंजाम दिया और कितने कारोबारी इनके शिकार हुए। हावड़ा के एक किराये के कमरे से संचालित हो रहा यह अंतरराज्यीय सिंडिकेट बड़ाबाजार के कारोबारी नेटवर्क को अपना निशाना बनाकर लंबे समय से ठगी कर रहा था। पुलिस अब गिरोह के पूरे नेटवर्क और इससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।