शिक्षक भर्ती विवाद से 42 हजार शिक्षकों का भविष्य अधर में : भाजपा

भाजपा सत्ता में आयी तो पारदर्शी और मेरिट आधारित भर्ती प्रक्रिया लागू की जाएगी
फाइल फोटो
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कोलकाता : पश्चिम बंगाल की शिक्षा व्यवस्था को लेकर भ्रष्टाचार, गिरती गुणवत्ता और युवाओं के भविष्य पर मंडराते संकट के बीच राज्य भाजपा ने तीखा हमला बोला है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता एवं मीडिया संयोजक प्रो. बिमल शंकर नंद ने कहा कि पिछले 15 वर्षों में कई घोटाले सामने आए हैं, लेकिन शिक्षा क्षेत्र में हुआ भ्रष्टाचार सबसे गंभीर और शर्मनाक है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस घोटाले के चलते लगभग 26,000 लोगों की नौकरियां चली गईं, जो देश के इतिहास में अभूतपूर्व है। इस स्थिति ने न केवल प्रशासनिक विफलता को उजागर किया है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता और गुणवत्ता पर भी गहरा असर डाला है। उन्होंने कहा कि सरकारी शिक्षा पर निर्भर गरीब और मध्यम वर्ग के छात्र अब निजी संस्थानों या राज्य से बाहर जाने को मजबूर हो रहे हैं।

प्रो. नंद ने यह भी कहा कि शिक्षक भर्ती में भ्रष्टाचार के कारण शिक्षकों की सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है और योग्य युवाओं में निराशा बढ़ी है। वर्तमान में प्राथमिक शिक्षक भर्ती से जुड़े कानूनी विवादों के कारण करीब 42,000 शिक्षकों का भविष्य अनिश्चित बना हुआ है, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है। इस स्थिति से उबरने के लिए भाजपा ने आश्वासन दिया है कि अगर पार्टी सत्ता में आती है तो पारदर्शी और मेरिट आधारित भर्ती प्रक्रिया लागू की जाएगी। शिक्षा संस्थानों में शैक्षणिक वातावरण को पुनर्स्थापित किया जाएगा और भ्रष्टाचार में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। इसके साथ ही शिक्षकों के लिए सातवें वेतन आयोग को लागू करने, प्रभावित अभ्यर्थियों को आयु सीमा में छूट देने तथा कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के बुनियादी ढांचे में सुधार करने का भी वादा पार्टी ने किया है।

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