पूर्व कुलपति को डिजिटल अरेस्ट कर ठग लिये 35 लाख रुपये

दो सप्ताह तक पूर्व कुलपति और उनकी पत्नी को किया गया नजरबंद
फाइल फोटो
फाइल फोटो
Published on

कोलकाता : महानगर में एक सरकारी और दो प्राइवेट यूनिवर्सिटी के पूर्व वाइस चांसलर रह चुके 77 वर्षीय वृद्ध डिजिटल अरेस्ट के ताजा शिकार हुए हैं। साइबर ठगों ने उनसे 35 लाख रुपये की ठगी की। आरोप है कि जालसाजों ने उन्हें दो सप्ताह तक उन्हें घर में नज़रबंद रखा। सॉल्ट लेक के रहने वाले प्रोफेसर अशोक रंजन ठाकुर एक जाने-माने शिक्षाविद और प्रशासक हैं, जिन्होंने मार्च 2001 से दिसंबर 2003 तक जादवपुर यूनिवर्सिटी के प्रो-वाइस चांसलर के रूप में भी काम किया था। घटना को लेकर विधाननगर साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज करायी गयी है।

क्या है पूरा मामला

पुलिस ने बताया कि अशोक रंजन ठाकुर और उनकी पत्नी को उन लोगों ने धोखा दिया, जिन्होंने इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के अधिकारी बनकर उन्हें नेशनल सिक्योरिटी एक्ट के तहत गिरफ्तारी की धमकी दी थी। पुलिस के अनुसार, 1 जनवरी से 14 जनवरी के बीच, ठाकुर को अलग-अलग नंबरों से कई फोन कॉल आए। कॉल करने वालों ने खुद को अलग-अलग पुलिस विभागों के अधिकारी बताया और कथित तौर पर उन्हें एक मनगढ़ंत आपराधिक मामले में गिरफ्तार करने की धमकी दी। उन पर पिछले साल गिरफ्तार किए गए आरोपित सदाकत खान से संबंध होने का आरोप लगाया गया था, जो कंबोडिया से चलने वाले एक अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी रैकेट से जुड़ा था और ग्लोबल साइबर क्राइम सिंडिकेट से भी जुड़ा था। ठाकुर ने अपनी शिकायत में लिखा, ‘मुझे पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट के लिए अप्लाई करने की सलाह दी गई। मुझे सुप्रीम कोर्ट की एक नोटिस दिखायी गयी जिसमें मुझे एक संदिग्ध के रूप में दिखाया गया था और उस पर मेरा आधार कार्ड नंबर था। उसमें लिखा था कि नोटिस मिलने के एक दिन के अंदर मुझे नेशनल सीक्रेट एक्ट 1980 के तहत गिरफ्तार कर लिया जाएगा और इससे मेरी सभी संपत्तियों को फ्रीज किया जा सकता है और जांच लंबित रहने तक अधिकतम डेढ़ साल की रिमांड हो सकती है।’ साइबर ठगों ने कथित तौर पर सिग्नल जैसे एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के ज़रिए बातचीत की और उन्हें नियमित रूप से अपनी लोकेशन बताने का निर्देश दिया, जिससे डर और मानसिक दबाव बना। उन्होंने लिखा, ‘कथित पुलिस वालों ने मुझसे अपनी पत्नी के साथ स्क्रीन शेयर करने को कहा, ताकि अगले कुछ दिनों तक जब भी कोई बात हो तो वह मौजूद रहें। मुझे हर दो घंटे में सिग्नल के जरिए अपनी लोकेशन बताने के लिए मजबूर किया गया।’ पुलिस ने बताया कि आरोपितों ने पीड़ित को अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट तोड़ने और वेरिफिकेशन के लिए पैसे ट्रांसफर करने के लिए उकसाया। 3 जनवरी, 2026 को 20 लाख रुपये आरटीजीएस के ज़रिए श्री गणेश टेलीकॉम नाम के एक बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए। इसके बाद, 7 जनवरी, 2026 को नेचर बायो एग्री केम प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर एक दूसरे अकाउंट में 15 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए, जिससे कुल रकम 35 लाख रुपये हो गई। ट्रांसफर के बाद, कथित तौर पर कॉल करने वालों ने सारा कम्युनिकेशन बंद कर दिया।

संबंधित समाचार

No stories found.

कोलकाता सिटी

No stories found.

खेल

No stories found.
logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in