'क्या जीते-जी अपना नाम फिर सूची में देख पाऊंगा?'

नाम बहाली के लिए पूर्व सांसद तरुण मंडल की शीर्ष स्तर पर गुहार
तरुण मंडल
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कोलकाता : "क्या मैं अपने जीवनकाल में फिर से मतदाता सूची में अपना नाम देख पाऊंगा?" यह सवाल किसी आम नागरिक का नहीं, बल्कि पूर्व SUCI सांसद तरुण मंडल का है। मतदाता सूची से नाम हटने के बाद उन्होंने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री, लोकसभा अध्यक्ष और मुख्य चुनाव आयुक्त सहित देश के शीर्ष संवैधानिक पदाधिकारियों को लिखित गुहार लगाई है। उनका कहना है कि यदि एक पूर्व सांसद को भी अपना नाम वापस दिलाने के लिए इस स्तर तक अपील करनी पड़ रही है, तो आम नागरिकों की स्थिति का सहज अनुमान लगाया जा सकता है। उनकी पीड़ा अब उन करीब 27 लाख मतदाताओं की चिंता का प्रतीक बन गई है, जिनकी अपीलें अब भी अपीलीय न्यायाधिकरण में लंबित हैं।

इसी मुद्दे को लेकर मताधिकार सुरक्षा समन्वय समिति ने 14 जुलाई को कोलकाता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश तथा राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन सौंपने का निर्णय लिया है। समिति का आरोप है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए और अपीलीय न्यायाधिकरण में मामलों के निपटारे की प्रक्रिया बेहद धीमी है। समिति का कहना है कि लंबित मामलों के कारण हजारों लोग लंबे समय से अपने मताधिकार से वंचित हैं।

गुरुवार को प्रेस क्लब में मीडिया से बातचीत के दौरान तरुण मंडल ने कहा कि न्यायाधिकरण में सुनवाई की मौजूदा रफ्तार बेहद निराशाजनक है। उन्होंने पूर्व मुख्य न्यायाधीश टी.एस. शिवज्ञानम की उस टिप्पणी का भी उल्लेख किया, जिसमें कहा गया था कि केवल एक लाख मामलों के निपटारे में ही कई वर्ष लग सकते हैं। ऐसे में लाखों लंबित आवेदनों के भविष्य को लेकर गंभीर अनिश्चितता बनी हुई है।

समिति का दावा है कि मतदाता सूची से नाम हटने के कारण अनेक लोगों को राशन, सरकारी योजनाओं, पुलिस सत्यापन, भूमि पंजीकरण और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। समिति ने मांग की है कि सभी वैध मतदाताओं के नाम तत्काल सूची में बहाल किए जाएं तथा 31 दिसंबर तक लंबित सभी अपीलों का निपटारा सुनिश्चित किया जाए।

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