

कोलकाता : लालबाज़ार ने शहर के सभी थाना और डिटेक्टिव विभागों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि किसी भी मामले में गवाहों की संख्या नहीं बल्कि उनकी गुणवत्ता बढ़ाई जानी चाहिए। आवश्यकता पड़ने पर गवाहों की संख्या कम करने को भी कहा गया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, हाल ही में पुलिस अधिकारियों को जारी दिशानिर्देश में लालबाज़ार ने बताया कि पुलिस का मुख्य लक्ष्य है अभियुक्त को हिरासत में रखते हुए अदालत से सजा सुनिश्चित कराना। कई गंभीर मामलों में अभियुक्त 10 वर्ष से अधिक समय से जेल में बंद हैं लेकिन कई मामलों जैसे साइबर, ड्रग्स तस्करी, डकैती तथा हत्या में हाई कोर्ट में अभियुक्तों की ओर से यह तथ्य दिया जा रहा है कि जांच बहुत पहले पूरी हो चुकी है, लेकिन गवाहों की संख्या इतनी अधिक है कि सबके बयान होने में वर्षों लग जाएंगे। इसलिए अभियुक्तों को इतने लंबे समय जेल में रखना उचित नहीं; वे अदालत की हर शर्त मानते हुए मुकदमे की अवधि में अदालत में उपस्थित रहेंगे। पुलिस का कहना है कि ऐसी दलीलों के आधार पर अदालत कई बार जमानत दे देती है लेकिन यदि गवाह कम हों, तो जल्दी गवाही, जल्दी सुनवाई और जल्दी फैसला संभव है। इससे हाईकोर्ट में गवाहों की अधिक संख्या की दलील भी नहीं दी जा सकेगी।
लालबाज़ार के अधिकारी मानते हैं कि इस प्रक्रिया से अभियुक्तों की सजा का प्रतिशत बढ़ेगा। इसलिए चार्जशीट दाखिल करने से पहले ही पुलिस को गवाहों का चयन गुणवत्ता के आधार पर करना होगा। जरूरत पड़ने पर किसी मामले के लिए विशेष सरकारी वकील भी नियुक्त किए जा सकते हैं। लालबाजार का सख्त निर्देश है कि तफ्तीश की गुणवत्ता बढ़ाई जाए, नए कानूनों की प्रक्रिया पूरी तरह निभाई जाए और प्रक्रिया में त्रुटि के कारण किसी भी अभियुक्त को जमानत न मिले, इसके लिए अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतनी होगी। पुलिस अधिकारियों से कहा गया है कि हर स्तर पर ठोस और तेज जांच सुनिश्चित की जाए ताकि अदालत में मुकदमे त्वरित और प्रभावी तरीके से पूरे हो सकें।