बंगाल के मछुआरों ने उठाई पारंपरिक मछली पकड़ने के अधिकारों की सुरक्षा की मांग

जलवायु बीमा पर दिया जोर
Kolkata
पारंपरिक मछली पकड़ने के अधिकारों की सुरक्षा की मांग
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कोलकाता: पश्चिम बंगाल के तटीय क्षेत्रों में मछली पकड़कर आजीविका चलाने वाले मछुआरों ने अपने पारंपरिक अधिकारों की सुरक्षा, जलवायु संबंधी आपदाओं से बचाव के लिए बीमा और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को मजबूत करने की मांग की है।

केंद्र सरकार की प्रस्तावित छोटे पैमाने की मत्स्य गतिविधियों को सुरक्षित और टिकाऊ बनाने की राष्ट्रीय कार्ययोजना (NPOA-SSF) के लिए आयोजित परामर्श बैठक में मछुआरा समुदाय ने अपनी समस्याएं और सुझावो को रखा।

दक्षिण 24 परगना के डायमंड हार्बर में हुई बैठक में 70 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। चर्चा में समुद्र तटीय विकास परियोजनाओं, चरम मौसमी घटनाओं और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं तक पहुंच जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।

पारंपरिक अधिकारों और तटीय परियोजनाओं में भागीदारी की मांग

बैठक में मछुआरों ने कहा कि तटीय क्षेत्रों में विकास परियोजनाओं के कारण उनके पारंपरिक मछली पकड़ने के अधिकार और आजीविका प्रभावित नहीं होने चाहिए। उन्होंने समुद्र और मुहाना क्षेत्रों में पारंपरिक अधिकारों की मान्यता तथा उनकी रक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की।

प्रतिनिधियों ने यह भी जोर दिया कि तटीय विकास से जुड़े फैसले लेते समय स्थानीय मछुआरा समुदाय की सहमति और भागीदारी सुनिश्चित की जाए। इसके लिए स्वतंत्र, पूर्व और सूचित सहमति (FPIC) के सिद्धांत को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग उठाई गई।

मछुआरों का कहना था कि नीतियां बनाते समय स्थानीय परिस्थितियों और समुदायों की जरूरतों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

चक्रवात और खराब मौसम से निपटने के लिए जलवायु बीमा की मांग

मछुआरा प्रतिनिधियों ने कहा कि चक्रवात, समुद्र में खराब मौसम और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के कारण उनकी आजीविका पर लगातार खतरा बना रहता है। ऐसी परिस्थितियों में होने वाले आर्थिक नुकसान की भरपाई के लिए उन्होंने मौसम संबंधी जोखिमों को ध्यान में रखकर विशेष बीमा योजनाएं शुरू करने की मांग की।

इसके साथ ही बेहतर चिकित्सा बीमा, मजबूत सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था और मछुआरों के पहचान पत्र आसानी से उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया। प्रतिनिधियों ने गांव स्तर पर आपदा प्रबंधन समितियों को मजबूत करने तथा आपदा की तैयारी और राहत कार्यों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का सुझाव दिया।

डायमंड हार्बर में तीसरी बैठक, राष्ट्रीय कार्ययोजना में शामिल होंगे सुझाव

डायमंड हार्बर में आयोजित यह बैठक पश्चिम बंगाल में छोटे मछुआरों के साथ परामर्श की तीसरी कड़ी थी। इससे पहले 6 अक्टूबर को काकद्वीप फिशिंग हार्बर और 8 अक्टूबर को पूर्व मेदिनीपुर के कांथी-दादनपत्रबर मछली उतारने के केंद्र पर बैठकें आयोजित की गई थीं। इन बैठकों में अलग-अलग तटीय क्षेत्रों के मछुआरों ने अपनी समस्याएं रखीं।

यह परामर्श प्रक्रिया केंद्रीय मत्स्य विभाग के नेतृत्व में चल रही है। बंगाल की खाड़ी कार्यक्रम अंतर-सरकारी संगठन (BOBP-IGO) इसमें समन्वय और तकनीकी सहयोग प्रदान कर रहा है। ईस्ट कोस्ट फिश वर्कर्स यूनियन ने भी इस प्रक्रिया में सहयोग किया है।

बैठकों से प्राप्त सुझावों को छोटे पैमाने की मत्स्य गतिविधियों के लिए तैयार की जा रही राष्ट्रीय कार्ययोजना में शामिल किया जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार, कार्ययोजना के मसौदे को 21 नवंबर 2026 को विश्व मत्स्य दिवस के अवसर पर सार्वजनिक चर्चा के लिए जारी करने का लक्ष्य है। इसके बाद समीक्षा और अंतिम प्रक्रिया पूरी कर 2027 में इसे अधिसूचित करने की योजना है।

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