फिरहाद ने की CM शुभेंदु की खुलकर तारीफ

21 जुलाई के शहीद दिवस पर भी खोले राज
फिरहाद हकीम
फिरहाद हकीम
Published on

कोलकाता : राज्य विधानसभा में सोमवार को एक दुर्लभ राजनीतिक तस्वीर देखने को मिली। पूर्व मंत्री एवं कोलकाता नगर निगम के पूर्व मेयर फिरहाद हकीम ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के एक फैसले की खुलकर सराहना करते हुए इसे विधानसभा के इतिहास का एक ऐतिहासिक कदम बताया।

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने घोषणा की कि यदि कोई विधायक अपने क्षेत्र की किसी जनसमस्या या जनहित के मुद्दे को लेकर संबंधित मंत्री को पत्र लिखता है या सदन में मामला उठाता है, तो संबंधित मंत्री को सात दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से लिखित जवाब देना होगा।

मुख्यमंत्री के इस फैसले पर फिरहाद ने कहा कि अपने लंबे राजनीतिक जीवन में उन्होंने विधायकों के प्रति ऐसी जवाबदेही पहले कभी नहीं देखी। उनके अनुसार, सत्ता और विपक्ष दोनों में रहने के बावजूद ऐसा नियम पहले कभी लागू नहीं हुआ। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि पिछले 15 वर्षों में भी ऐसी व्यवस्था देखने को नहीं मिली।

शुभेंदु के हाथ से छीना गया था माइक

फिरहाद ने 21 जुलाई के शहीद दिवस को लेकर भी बड़ा खुलासा किया। उन्होंने कहा कि समय के साथ इस कार्यक्रम का मूल उद्देश्य बदल गया और यह श्रद्धांजलि के बजाय उत्सव का रूप लेने लगा। कई नेताओं को इस पर आपत्ति थी, लेकिन उस समय खुलकर विरोध करने का साहस किसी में नहीं था।

उन्होंने तत्कालीन युवा तृणमूल अध्यक्ष शुभेंदु अधिकारी का उल्लेख करते हुए कहा कि ब्रिगेड की एक सभा में उनके हाथ से माइक भी छीन लिया गया था। साथ ही 21 जुलाई 1993 की घटना को याद करते हुए उन्होंने कहा कि उस दिन वह भी गोलीबारी में मारे जा सकते थे, लेकिन एक अज्ञात व्यक्ति ने उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाकर उनकी जान बचाई।

उन्होंने कहा कि 21 जुलाई उनके लिए केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि संघर्ष, शहादत और जीवनदान की यादों से जुड़ा एक भावनात्मक दिन है।

Google पर सन्मार्ग न्यूज़ पडे →
logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in