स्कूलों में ‘साइलेंट बुलिंग’ पर विशेषज्ञों ने जताई चिंता

बच्चों के व्यवहार में बदलाव पर नजर रखने की सलाह
Kolkata
‘साइलेंट बुलिंग’
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कोलकाता : स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों में होने वाली ऐसी बुलिंग, जो सीधे तौर पर दिखाई नहीं देती, अब विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय बन रही है। विशेषज्ञों ने स्कूलों और अभिभावकों से बच्चों के बीच होने वाले ‘साइलेंट बुलिंग’ के मामलों को गंभीरता से लेने और शुरुआती संकेतों पर ध्यान देने की अपील की है।

साइलेंट बुलिंग में किसी बच्चे को खुले तौर पर परेशान करने के बजाय उसे समूह से अलग करना, लगातार नजरअंदाज करना, सामाजिक रूप से अलग-थलग करना या मानसिक दबाव बनाना शामिल हो सकता है।

ऐसी गतिविधियां बाहर से मामूली लग सकती हैं, लेकिन लंबे समय तक जारी रहने पर बच्चे के आत्मविश्वास, सामाजिक व्यवहार और मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है।

शिक्षकों को संवेदनशील बनाने पर जोर

विशेषज्ञों का कहना है कि स्कूलों को केवल पढ़ाई और अनुशासन तक सीमित रहने के बजाय बच्चों के सामाजिक और भावनात्मक व्यवहार पर भी नजर रखनी चाहिए। शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए संवेदनशीलता प्रशिक्षण तथा छात्रों के बीच पीयर-सपोर्ट कार्यक्रम शुरू करने जैसे कदम मददगार हो सकते हैं।

माता-पिता की भूमिका भी अहम

बच्चे के व्यवहार में अचानक बदलाव, दोस्तों से दूरी या सामाजिक गतिविधियों से बचने जैसे संकेतों को अभिभावकों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। विशेषज्ञों ने माता-पिता को बच्चों से खुलकर बातचीत करने और उनकी भावनात्मक स्थिति समझने की सलाह दी है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, स्कूल, परिवार और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ मिलकर काम करें तो इस तरह की छिपी हुई बुलिंग की पहचान समय रहते की जा सकती है और बच्चों को सुरक्षित एवं सहयोगी माहौल उपलब्ध कराया जा सकता है।

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