केंद्रीय बजट से उद्योग व एमएसएमई क्षेत्र की अपेक्षाएं

केंद्रीय बजट से उद्योग व एमएसएमई क्षेत्र की अपेक्षाएं
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सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले उद्योग और एमएसएमई सेक्टर को आगामी केंद्रीय बजट से बड़ी उम्मीदें हैं। यह क्षेत्र न केवल करोड़ों लोगों को रोजगार देता है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की नींव भी है। यह मानना है विप्र चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के निदेशक अमित शर्मा का। शर्मा का विचार है कि एमएसएमई को सस्ता व आसान ऋण मिले, ताकि छोटे उद्यम बिना डर के अपना व्यवसाय बढ़ा सकें। बैंकों की प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाए और क्रेडिट गारंटी योजनाओं का दायरा बढ़े। इतना ही नहीं, कर (टैक्स) संरचना को सरल और व्यावहारिक बनाया जाए, ताकि छोटे उद्योग अनावश्यक जटिलताओं से मुक्त होकर केवल उत्पादन और रोजगार पर ध्यान दे सकें।

कच्चे माल की बढ़ती लागत को नियंत्रित करने के लिए आयात शुल्क में युक्तिसंगत सुधार और घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत किया जाए। डिजिटल भुगतान, ई-इनवॉयसिंग और जीएसटी रिफंड प्रक्रिया को तेज और सरल बनाया जाए, जिससे कार्यशील पूंजी पर दबाव कम हो। महिला और युवा उद्यमियों के लिए विशेष प्रोत्साहन पैकेज लाकर नए उद्योगों को बढ़ावा दिया जाए। उनका कहना है कि मुझे विश्वास है कि यह बजट उद्योगों को नई ऊर्जा देगा और भारत को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने में निर्णायक भूमिका निभाएगा।

हरि प्रसाद शर्मा, चेयरमैन सह प्रबंध निदेशक, श्रीआरएसएच ग्रुप

वर्तमान आर्थिक परिदृश्य में केंद्रीय बजट से यह अपेक्षा है कि वह मध्यम वर्ग को ठोस राहत प्रदान करे, विशेषकर आयकर स्लैब के युक्तिकरण और महंगाई पर प्रभावी नियंत्रण के माध्यम से। इससे आम नागरिकों की क्रय शक्ति बढ़ेगी और उपभोग को प्रोत्साहन मिलेगा।

अवसंरचना, रियल एस्टेट, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) तथा स्टार्ट-अप्स को लक्षित समर्थन आर्थिक विकास को गति देने और रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इन क्षेत्रों में निवेश बढ़ने से औद्योगिक गतिविधियों में तेजी आएगी और समग्र अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

हरि प्रसाद शर्मा
हरि प्रसाद शर्मा

स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए बजट आवंटन में वृद्धि अत्यंत आवश्यक है, ताकि सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार हो और आम जनता को बेहतर एवं सुलभ सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा सकें। ये दोनों क्षेत्र देश के मानव संसाधन के विकास की नींव हैं।

डिजिटल इंडिया, हरित ऊर्जा तथा घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने वाली नीतियाँ भारत को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सशक्त बनाएंगी। स्वच्छ ऊर्जा और तकनीकी नवाचार भविष्य की सतत विकास आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायक सिद्ध होंगे।

समग्र रूप से, एक ऐसा विकासोन्मुख और समावेशी बजट, जो वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हुए सामाजिक कल्याण को भी प्राथमिकता दे, देश की आर्थिक गति को बनाए रखने और नागरिकों तथा व्यवसाय जगत के बीच विश्वास को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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