

नेहा, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : कोलकाता एयरपोर्ट पर इस सर्दी कोहरे के कारण उड़ानों में कम बाधा आने की संभावना है। मुख्य रनवे, जो आमतौर पर उड़ानों के टेकऑफ और लैंडिंग के लिए उपयोग होता है, अब दोनों सिरों पर आधुनिक इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) से लैस होगा। यह कैटेगरी (CAT) III-B सिस्टम घने कोहरे में भी उड़ानों को तब उतरने में सक्षम बनाएगा जब दृश्यता मात्र 50 मीटर तक सीमित हो।
27 नवंबर से दोनों सिरों पर CAT III-B सिस्टम
कोलकाता एयरपोर्ट अधिकारी ने बताया, “27 नवंबर से मुख्य रनवे दोनों सिरों पर CAT III-B ILS सिस्टम से सुसज्जित होगा। पहले केवल न्यू टाउन की दिशा वाला एरिया (01R) CAT III-B से लैस था, जबकि मध्यमग्राम की दिशा वाला एरिया (19L) केवल CAT II ILS से लैस था। अब यदि न्यू टाउन दिशा से आने वाले रनवे में कोई समस्या आती है, तो भी उड़ानें कोहरे में सुचारू रूप से चल सकेंगी।”
रनवे पर संचालन में आएगी तेजी
पायलटों के अनुसार, CAT III-B ILS की उपलब्धता से एयरपोर्ट की परिचालन विश्वसनीयता और दक्षता दोनों में सुधार होगा। एक वरिष्ठ पायलट ने कहा, “अगर कोहरा या भारी बारिश के कारण दृश्यता घट जाती है, तो भी उड़ानें हवा की दिशा के अनुसार किसी भी ओर से उतर सकती हैं। इससे रनवे का उपयोग अधिक लचीला और प्रभावी होगा।” एक अन्य पायलट ने बताया कि रनवे के दोनों सिरों के उपयोग की सुविधा से एटीसी (एयर ट्रैफिक कंट्रोल) उड़ानों के प्रवाह के अनुसार रनवे की दिशा बदल सकती है। “जब उत्तर से कई उड़ानें आती हैं, तो मध्यमग्राम की दिशा वाला सिरा उपयोग किया जा सकता है, और जब दक्षिण से अधिक उड़ानें आती हैं, तो राजारहाट दिशा वाला सिरा। इससे ईंधन की बचत होगी और लैंडिंग प्रक्रिया छोटी हो जाएगी।”
पायलट प्रशिक्षण आवश्यक
हालांकि एयरपोर्ट अब CAT III-B ऑपरेशनों के लिए तैयार है, पायलटों को भी कम दृश्यता में संचालन का प्रशिक्षण आवश्यक है। इंडिगो के सूत्रों ने बताया कि उनके सभी पायलट प्रशिक्षित हैं, जबकि एयर इंडिया ने कहा कि उनके अधिकांश पायलट भी इस प्रणाली के लिए तैयार हैं। वर्तमान में सेकेंडरी रनवे का CAT-I ILS सिस्टम, जो 550 मीटर तक की दृश्यता में उड़ानों को अनुमति देता है, मरम्मत कार्य के कारण निष्क्रिय है। इसके अलावा, रनवे में Runway Visual Range (RVR) और Required Navigation Performance (RNP) जैसी आधुनिक प्रणालियां भी मौजूद हैं, जो कम दृश्यता में सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चित करती हैं।