आयुष्मान कार्ड में तकनीकी गड़बड़ी हुई तो भी नहीं रुकेगा इलाज

अस्पताल में कैशलेस इलाज को लेकर स्वास्थ्य भवन ने तय की नई व्यवस्था
फाइल फोटो
फाइल फोटो
Published on

मधुर, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : आयुष्मान भारत और स्वास्थ्य साथी योजना को लेकर मरीजों की उलझन दूर करने के लिए स्वास्थ्य भवन ने नई गाइडलाइन जारी की है। इसके तहत स्पष्ट किया गया है कि अस्पताल पहुंचने पर मरीज को किस योजना के तहत इलाज मिलेगा और किन परिस्थितियों में स्वास्थ्य साथी के जरिए उपचार जारी रखा जा सकेगा। आयुष्मान भारत योजना और मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को 5 लाख रुपये तक की कैशलेस स्वास्थ्य सेवा का प्रावधान है। वहीं, स्वास्थ्य साथी की सुविधा भी फिलहाल जारी रखी गई है।

आयुष्मान कार्ड है तो PM-JAY के तहत इलाज

नई व्यवस्था के मुताबिक, जिस मरीज का आयुष्मान भारत कार्ड पहले ही बन चुका है, उसका इलाज प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) के तहत किया जाएगा। नए मरीज के अस्पताल में पंजीकरण के समय स्वास्थ्य साथी पोर्टल पर आधार संबंधी जानकारी का सत्यापन किया जाएगा। यदि मरीज का आधार नंबर प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के कार्ड प्रिंटिंग डेटाबेस में मिलता है तो स्क्रीन पर ग्रीन सिग्नल दिखाई देगा। इसका मतलब होगा कि मरीज पश्चिम बंगाल में प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का लाभ लेने के योग्य है। साथ ही आयुष्मान कार्ड डाउनलोड करने का लिंक भी उपलब्ध होगा। इसके बाद अस्पताल को ‘प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना पर आगे बढ़ें’ विकल्प चुनकर, पोर्टल के जरिए इलाज की प्रक्रिया आगे बढ़ानी होगी। यानी आयुष्मान कार्ड उपलब्ध होने पर मरीज का उपचार स्वास्थ्य साथी से आयुष्मान भारत योजना में स्थानांतरित हो जाएगा।

PM-JAY पोर्टल में तकनीकी समस्या तो क्या होगा?

स्वास्थ्य भवन ने ऐसी स्थिति के लिए भी व्यवस्था की है, जब आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना पोर्टल पर तकनीकी या अन्य समस्या के कारण इलाज की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाती। ऐसे में अस्पताल को ‘प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में दिक्कत आ रही है’ विकल्प चुनना होगा। इसके बाद ‘स्वास्थ्य साथी ट्रीटमेंट कंसेंट’ नाम से एक पॉप-अप खुलेगा। अस्पताल को वहां समस्या का विस्तृत विवरण दर्ज करना होगा और उसके प्रमाण के तौर पर संबंधित स्क्रीनशॉट भी अपलोड करना होगा। जानकारी और दस्तावेज जमा करने के बाद ‘स्वास्थ्य साथी ट्रीटमेंट के लिए आगे बढ़ें’ विकल्प सक्रिय हो जाएगा। इसके बाद मरीज का इलाज स्वास्थ्य साथी की सामान्य प्रक्रिया के तहत जारी रखा जा सकेगा। यानी प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना पोर्टल में वास्तविक तकनीकी समस्या होने पर मरीज को इलाज से वंचित नहीं किया जाएगा।

ई-केवाईसी पूरा, लेकिन कार्ड मंजूर नहीं हुआ तो?

निर्देशिका में ई-केवाईसी से जुड़ी स्थिति को भी स्पष्ट किया गया है। यदि किसी लाभार्थी का नाम राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के डेटाबेस में है और प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के लिए ई-केवाईसी पूरा हो चुका है, लेकिन आयुष्मान कार्ड को अभी मंजूरी नहीं मिली है, तो अस्पताल को स्वास्थ्य साथी के तहत इलाज जारी रखने का निर्देश दिया गया है। वहीं, यदि लाभार्थी का नाम राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम डेटाबेस में है, लेकिन ई-केवाईसी पूरा नहीं हुआ है, तो अस्पताल को पहले प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना पोर्टल पर ई-केवाईसी कराने का प्रयास करना होगा।

70 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए भी प्रावधान

70 वर्ष या उससे अधिक आयु के लाभार्थियों के मामले में वीवीएस रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया भी पूरी करनी होगी। इसके बाद मरीज का इलाज स्वास्थ्य साथी योजना के तहत आगे बढ़ाया जा सकेगा। यदि किसी मरीज के पास न तो स्वास्थ्य साथी कार्ड है और न ही आयुष्मान भारत कार्ड, तब भी इलाज का रास्ता बंद नहीं होगा। ऐसे मरीज मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत सुविधा प्राप्त कर सकेंगे। इसके लिए आवेदन फॉर्म अस्पताल से ही उपलब्ध कराया जाएगा।

Google पर सन्मार्ग न्यूज़ पडे →
logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in