

प्रसेनजीत, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : इन दिनों महानगर के टेंगरा इलाके में चुनावी माहौल एक अलग ही रंग लिए हुए है। यह इलाका, जिसे ‘कोलकाता का चाइना टाउन’ भी कहा जाता है। यह इलाका लंबे समय से चीनी-भारतीय समुदाय का घर रहा है। यह क्षेत्र मुख्य रूप से कसबा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत, वार्ड नंबर 66 में स्थित है, जबकि इसका कुछ हिस्सा इंटाली विधानसभा क्षेत्र की सीमा से भी सटा हुआ है। आज भी कोई व्यक्ति यह देखकर आश्चर्यचकित रह सकता है कि संकरी गलियों में झूलते लाल लालटेन, बौद्ध प्रतीक, सोया सॉस और पारंपरिक नूडल्स की खुशबू, ये सब मिलकर इसकी विशिष्ट पहचान बनाते हैं। यहां एक शताब्दी पुराना चीनी काली मंदिर भी मौजूद है, जो सांस्कृतिक मिश्रण की अनोखी मिसाल है।
मंदारिन भाषा में लिखे राजनीतिक संदेश
चुनाव के दौरान यहां की दीवारों पर एक असामान्य दृश्य देखने को मिलता है-मंदारिन भाषा में लिखे राजनीतिक संदेश। यह भारतीय चुनावी राजनीति में दुर्लभ है और इस बात का संकेत है कि राजनीतिक दल इस छोटे लेकिन ऐतिहासिक समुदाय को भी अपने अभियान में शामिल करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि स्थानीय लोगों की बातचीत में चुनावी उत्साह से अधिक भविष्य की चिंता झलकती है। कई निवासी कहते हैं कि उनकी प्राथमिकता राजनीतिक दल नहीं, बल्कि रोजगार, सुरक्षा और अपने व्यवसायों का भविष्य है। पैट्रिक लियू, एक चीनी बुजुर्ग ने कहा, “किसी को हमारी परवाह नहीं है, न सरकार को और न ही प्रशासन को। सिर्फ चुनाव के समय राजनीतिक दल आते हैं, हमें आश्वासन देते हैं, लेकिन बाद में भूल जाते हैं।”
पुनर्विकास और मुआवजे की नीतियां पर्याप्त नहीं
एक अन्य चीनी व्यक्ति सैमुअल ली ने कहा, टेंगरा कभी चमड़े की फैक्ट्रियों और टैनरी उद्योग का केंद्र था, लेकिन अब वह धीरे-धीरे रेस्तरां और पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बदल रहा है। कई पुराने कारखाने बंद हो चुके हैं या किराये पर दे दिए गए हैं। कुछ लोगों का कहना है कि पुनर्विकास और मुआवजे की नीतियां उनके लिए पर्याप्त नहीं हैं, जिससे विस्थापन का डर बढ़ रहा है। हालांकि 2020 के गलवान संघर्ष के बाद कुछ आशंकाएं जरूर थीं, लेकिन स्थानीय लोगों के अनुसार यहां बड़े पैमाने पर किसी तरह की नकारात्मकता नहीं फैली। आज टेंगरा के लोग अपनी पहचान, संस्कृति और भविष्य को लेकर एक अनिश्चित दौर से गुजर रहे हैं जहां चुनावी संदेशों से ज्यादा महत्वपूर्ण उनकी रोजमर्रा की स्थिरता बन गई है।
SIR का चाइना टाउन पर पड़ा गहरा असर
मतदाता आंकड़ों के अनुसार, शहर की चीनी-भारतीय आबादी में SIR के तहत मतदाताओं की संख्या में 484 की गिरावट दर्ज की गई है। इस गिरावट का बड़ा हिस्सा टेंगरा से जुड़ा है, जो कोलकाता के कसबा, इंटाली और चौरंगी विधानसभा क्षेत्रों में फैला हुआ है। यहां रहने वाले अधिकांश चीनी-भारतीय मतदाता पहले टैनरी उद्योग और व्यापार से जुड़े रहे हैं, लेकिन पिछले कुछ दशकों में रोजगार और प्रवासन के कारण समुदाय की संख्या लगातार घटती गई है। आंकड़े यह भी दिखाते हैं कि 1960 के दशक में जहां कोलकाता में चीनी समुदाय की आबादी लगभग 45,000–50,000 तक थी, वहीं अब यह घटकर 1000-1500 तक सीमित रह गई है।