घर बैठे 'अरेस्ट' रहे 20 दिन: साइबर ठगों ने वृद्ध से ऐंठ लिये 3.26 करोड़ रुपये

न्यू टाउन के वृद्ध ने विधाननगर साइबर क्राइम थाने में दर्ज करायी शिकायत
फाइल फोटो
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कोलकाता : महानगर में साइबर ठगों ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच और सीबीआई का अधिकारी बताकर एक वृद्ध से 3.26 करोड़ रुपये ठग लिये। घटना को लेकर न्यू टाउन के रहनेवाले मलय बसु राय ने विधाननगर साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज करायी है। आरोप है कि जालसाजों ने व्यक्ति को करीब 20 दिनों तक घर में हाउस सर्विलांस के नाम पर डिजिटल अरेस्ट करके रखा।

क्या है पूरा मामला

पुलिस सूत्रों के अनुसार पीड़ित मलय बसु राय ने बताया कि घटना की शुरुआत 16 दिसंबर 2025 को हुई थी। उन्हें एक फोन कॉल आया, जिसमें कॉल करने वालों ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताया। आरोप लगाया गया कि उनके आधार कार्ड का दुरुपयोग कर मुंबई के चेंबूर इलाके से एक सिम कार्ड जारी किया गया है, जिस पर अवैध विज्ञापन और उत्पीड़न के 24 मामले दर्ज हैं। ठगों ने फर्जी एफआईआर का हवाला देते हुए मलय को डराया और बाद में मामले को सीबीआई से जोड़ दिया। इसके बाद उन्हें एक गंभीर केस में फंसाने की धमकी दी गई। पीड़ित को फर्जी गिरफ्तारी आदेश और फंड फ्रीजिंग नोटिस भेजी गयी और ‘उम्र का हवाला देकर राहत’ का झांसा देते हुए कोलकाता में ही घर में हाउस सर्विलांस में रख दिया गया। मानसिक दबाव और गिरफ्तारी के डर में पीड़ित से उनकी पूरी वित्तीय जानकारी बैंक खाते, एफडी, पीपीएफ, शेयर, म्युचुअल फंड की जानकारी ले ली गई। ठगों ने भरोसा दिलाया कि ‘सुप्रीम कोर्ट के निर्देश’ पर सत्यापन के बाद सारी रकम लौटा दी जाएगी। इस दौरान पीड़ित को मजबूरन 2.23 करोड़ रुपये से अधिक के शेयर बेचने पड़े। इसके अलावा एफडी, पीपीएफ और म्युचुअल फंड के रुपये भी निकालकर जालसाजों के अकाउंट में ट्रांसफर करने पड़े। जालसाजों ने 20 लाख रुपये एक कथित जमानत आदेश के नाम पर लिये जिसमें सुप्रीम कोर्ट के जज का फर्जी हवाला दिया गया।

पीड़ित ने बताया कि यह पूरा मामला संगठित साइबर गिरोह द्वारा अंजाम दिया गया डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड है। उन्होंने अभियुक्तों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर राशि की बरामदगी और गहन जांच की मांग की है। पुलिस मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की प्रक्रिया में जुट गई है।

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