

नेहा, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : पश्चिम बंगाल में मानव तस्करी और वेश्यावृत्ति के कथित संगठित रैकेट के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई की है। शुक्रवार को एजेंसी ने कोलकाता, बिधाननगर, उत्तर 24 परगना और सिलीगुड़ी समेत कई स्थानों पर एक साथ आठ ठिकानों पर छापेमारी की। जांच एजेंसी का कहना है कि यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत की गई है।
ईडी सूत्रों के अनुसार, यह मामला 2015 में दर्ज एक एफआईआर से जुड़ा है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि कुछ बार और रेस्तरां की आड़ में महिलाओं की तस्करी और देह व्यापार का नेटवर्क चलाया जा रहा था। इस रैकेट में शामिल मुख्य आरोपी हैं — जगजीत सिंह, अजमल सिद्दीकी और बिष्णु मुंद्रा, जो कोलकाता के कारोबारी बताए जा रहे हैं। ईडी का कहना है कि आरोपियों ने “नौकरी दिलाने” के बहाने महिलाओं को अपने जाल में फंसाया, फिर उन्हें वेश्यावृत्ति में धकेल कर करोड़ों रुपये की कमाई की।
जांच में यह भी सामने आया है कि इस ग़ैरक़ानूनी कारोबार से प्राप्त बड़ी रकम को सफेद करने के लिए आरोपियों ने कई कंपनियों के माध्यम से धन का लेनदेन किया। नकद में कमाए गए करोड़ों रुपये को फर्जी कंपनियों और घोस्ट अकाउंट्स के जरिये वैध दिखाया गया।
ईडी अधिकारियों ने बताया कि छापेमारी सॉल्टलेक, नागेरबाजार और कोलकाता के अन्य हिस्सों में की गई। एजेंसी ने इन तीन व्यापारियों के घरों, दफ्तरों और उनसे जुड़े एक सिविल इंजीनियर के फ्लैट में भी तलाशी ली। जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और वित्तीय रिकॉर्ड जब्त किए गए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, इन तीनों कारोबारियों की कोलकाता और आसपास कई बार हैं। संदेह है कि इन्हीं बार में अवैध गतिविधियां चलती थीं — जहां महिलाओं का शोषण किया जाता था और ग्राहकों से मोटी रकम वसूली जाती थी। इसके बाद यह पैसा कंपनियों के खातों में घुमाकर वैध दिखाया जाता था।
ईडी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह अवैध धन कहां निवेश किया गया, किन लोगों को प्रोटेक्शन मनी दी गई और क्या इसमें स्थानीय प्रभावशाली लोगों या अधिकारियों की भूमिका रही। एजेंसी का मानना है कि यह कोई अलग घटना नहीं बल्कि एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा है जो वर्षों से सक्रिय है।
साथ ही, ईडी ने हाल ही में हुए बालू तस्करी मामले को भी इससे जोड़कर देखा है। अधिकारियों के अनुसार, दोनों मामलों में अवैध धन को वैध बनाने का तरीका लगभग समान है — यानी फर्जी कंपनियों और ई-चालान के जरिये मनी लॉन्ड्रिंग।
इस व्यापक कार्रवाई से ईडी ने साफ कर दिया है कि वह बंगाल में मानव तस्करी, अवैध खनन और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे मामलों पर सख्त रुख अपनाने के मूड में है।