

कोलकाता : "ईस्ट-वेस्ट मेट्रो परियोजना के चलते बेघर हुए लोगों के लिए नए मकानों का निर्माण भूगर्भीय रूप से संवेदनशील इलाके में किया जा रहा है, जिससे पुनर्निर्माण का कार्य तकनीकी रूप से काफी चुनौतीपूर्ण बन गया है।"
कोलकाता मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (केएमआरसी) ने धंसाव के केंद्र रहे दुर्गा पितुरी लेन के खुले हिस्से में नए मकानों का निर्माण शुरू कर दिया है। हालांकि, पूरी जमीन पर निर्माण नहीं किया जा रहा है।
सुरंग के ऊपर विशेष तकनीक से होगा निर्माण
जिस हिस्से के नीचे मेट्रो की दो भूमिगत सुरंगें गुजर रही हैं, वहां फिलहाल निर्माण कार्य रोककर विशेष तकनीकी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इंजीनियरों के अनुसार, सुरंगें जमीन से लगभग 15 मीटर नीचे स्थित हैं।
ऐसे में वहां पारंपरिक गहरी नींव करना सुरक्षित नहीं है। इसलिए उस हिस्से में आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों की मदद से भवन तैयार किए जाएंगे।
किया जाएगा प्लेट लोड टेस्ट
मकानों का निर्माण शुरू करने से पहले प्लेट लोड टेस्ट किया जाएगा। इस परीक्षण के जरिए मिट्टी की भार वहन क्षमता और जमीन के बैठने की स्थिति का आकलन किया जाएगा। इसके लिए स्टील की प्लेट पर भार डालकर मिट्टी की मजबूती जांची जाएगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि जहां पाइलिंग संभव नहीं होती, वहां आमतौर पर दो तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है। पहली, ग्राउंड इम्प्रूवमेंट, जिसके तहत मिट्टी को मजबूत बनाया जाता है, और दूसरी राफ्ट या मैट फाउंडेशन, जिसमें इमारत का पूरा भार बड़े क्षेत्र में समान रूप से वितरित किया जाता है।
सूत्रों के मुताबिक, सुरंग से दूर स्थित भवनों के लिए पहले ही विस्तृत भू-तकनीकी परीक्षण किए जा चुके हैं। उन स्थानों पर 15 से 20 मीटर गहरी पाइलिंग के जरिए नींव तैयार की जा रही है। चार नए भवनों का निर्माण इसी तकनीक से पूरा भी हो चुका है।
केएमआरसी ने प्रभावित क्षेत्र की मिट्टी का विस्तृत सर्वे और परीक्षण पहले भी कराया था। वर्ष 2019 में सुरंग में पानी के रिसाव से प्रभावित हुई जमीन का गहन अध्ययन करने के बाद ही पुनर्निर्माण की योजना तैयार की गई।
गौरतलब है कि 31 अगस्त से 12 सितंबर 2019 के बीच ईस्ट-वेस्ट मेट्रो सुरंग में पानी रिसने के कारण दुर्गा पितुरी लेन और आसपास के इलाके में बड़े पैमाने पर जमीन धंसने की घटना हुई थी। अब रिसाव रुकने और जमीन को स्थिर करने के बाद प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए नए मकानों का निर्माण चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है।