बारिश से बचाव के लिए दुर्गा पूजा आयोजकों की तैयारी तेज, पंडालों पर लग रहे सुरक्षा कवच

कपड़ों की जगह प्लाईवुड का इस्तेमाल, खुले मैदानों में लकड़ी के पटरे और अस्थायी शेड की व्यवस्था
Kolkata
पंडालों पर लग रहे सुरक्षा कवच
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कोलकाता : दुर्गा पूजा से पहले मौसम की अनिश्चितता ने कोलकाता के पूजा आयोजकों की चिंता बढ़ा दी है। लगातार बदलते मौसम और बारिश की आशंका को देखते हुए विभिन्न पूजा समितियों ने पंडालों और बाहरी सजावट को सुरक्षित रखने के लिए अतिरिक्त इंतजाम शुरू कर दिए हैं।

कहीं पंडालों को ढका जा रहा है, तो कहीं सजावटी ढांचों में कपड़े के बजाय प्लाईवुड का इस्तेमाल किया जा रहा है। आयोजकों का उद्देश्य बारिश से होने वाले नुकसान को कम करना और श्रद्धालुओं को सुरक्षित एवं सुविधाजनक माहौल उपलब्ध कराना है।

देशप्रिय पार्क में बारिश से बचाव के लिए अतिरिक्त इंतजाम

देशप्रिय पार्क दुर्गोत्सव में बारिश के कारण तैयारियों की रफ्तार प्रभावित हुई है। आयोजकों ने पंडाल के कुछ हिस्सों को ढक दिया है और सजावट का काम सावधानी से करने के निर्देश दिए हैं। बिजली के उपकरणों की सुरक्षा पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

भागवती पार्क में प्लाईवुड से तैयार हो रहे सजावटी ढांचे

जेसोर रोड स्थित भागवती पार्क सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति ने बारिश की आशंका को देखते हुए पंडाल के बाहर एक अतिरिक्त शेड बनाया है, ताकि बारिश के दौरान श्रद्धालु वहां आश्रय ले सकें।

समिति के सचिव ने बताया कि बाहरी सजावट में भी बदलाव किया गया है। पहले कपड़े से बनने वाले कुछ इंस्टॉलेशन अब प्लाईवुड से तैयार किए जा रहे हैं, जिससे बारिश से होने वाले नुकसान का जोखिम कम किया जा सके।

कॉलेज स्क्वायर से कुम्हारटोली तक बढ़ी सतर्कता

बारिश से खुले मैदानों की जमीन फिसलन भरी हो गई है। ऐसे में कई पूजा समितियां लोगों की आवाजाही आसान बनाने के लिए लकड़ी के पटरे बिछा रही हैं। कॉलेज स्क्वायर सार्वजनिक दुर्गोत्सव समिति के मुख्य आयोजक ने कहा कि बारिश से काम धीमा हुआ है, लेकिन सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

दूसरी ओर, कुम्हारटोली के मूर्तिकार भी प्रतिमाओं की रंगाई और अंतिम सज्जा को बारिश से बचाने में जुटे हैं। तैयार प्रतिमाओं को पंडालों तक ले जाते समय प्लास्टिक शीट से ढका जा रहा है।

दुर्गा पूजा की तैयारियों के अंतिम चरण में आयोजकों के सामने समय पर काम पूरा करने के साथ पंडाल, प्रतिमाओं, बिजली व्यवस्था और श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दोहरी चुनौती है।

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