

कोलकाता : भारतीय सांख्यिकी संस्थान (आईएसआई) के प्रशासनिक ढांचे में बदलाव के लिए केंद्र सरकार द्वारा लोकसभा में पेश किए गए नए विधेयक का विरोध तेज हो गया है।
शुक्रवार को आईएसआई के शिक्षकों देवरूप चक्रवर्ती, महुआ दत्ता और पारमिता दास ने प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेजने की मांग की। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने भी नई शिक्षा नीति और प्रस्तावित विधेयक की आलोचना की।
शिक्षकों का आरोप है कि सरकार ने विधेयक लाने से पहले संस्थान से कोई व्यापक परामर्श नहीं किया। उनका कहना है कि इससे आईएसआई की स्वायत्तता प्रभावित होगी और अकादमिक परिषद की भूमिका कमजोर पड़ सकती है।
पारमिता दास ने कहा कि गरीब और मेधावी छात्रों को नि:शुल्क उच्च शिक्षा तथा छात्रवृत्ति उपलब्ध कराने की मौजूदा व्यवस्था पर भी इसका असर पड़ सकता है। कांग्रेस नेता प्रसेनजीत बसु ने कोलकाता स्थित आईएसआई मुख्यालय के भविष्य को लेकर भी चिंता जताई।
हालांकि, केंद्रीय सांख्यिकी मंत्रालय के सूत्रों ने इन आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा कि संस्थान की स्वायत्तता बरकरार रहेगी और कोलकाता स्थित मुख्यालय यथावत रहेगा। साथ ही, शुल्क निर्धारण का निर्णय सरकार नहीं, बल्कि संस्थान का संचालन बोर्ड करेगा।