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कोलकाता में घोड़ा-गाड़ियों पर रोक की मांग, PETA ने मुख्यमंत्री से की अपील

घोड़ा-गाड़ियों को चरणबद्ध तरीके से बंद कर शुरू की जाए ई-कैरिज
Kolkata
PETA India की मांग: कोलकाता में चरणबद्ध तरीके से बंद हों घोड़ा-गाड़ियां
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कोलकाता : पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में पर्यटकों की सवारी के लिए इस्तेमाल की जाने वाली पारंपरिक घोड़ा-गाड़ियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। पशु अधिकारों के लिए कार्यरत संगठन PETA India ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि शहर में चल रही घोड़ा-गाड़ियों को चरणबद्ध तरीके से बंद कर उनकी जगह आधुनिक, पर्यावरण के अनुकूल इलेक्ट्रिक कैरिज (ई-कैरिज) शुरू की जाए।

साथ ही, घोड़ा-गाड़ी संचालकों और मालिकों के लिए समुचित पुनर्वास एवं वैकल्पिक रोजगार की नीति भी तैयार करने की मांग की गई है। PETA India का कहना है कि संस्था द्वारा किए गए आकलन में यह सामने आया है कि पर्यटकों को ढोने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे अधिकांश घोड़ों की स्थिति अत्यंत दयनीय है।

रिपोर्ट के अनुसार कई घोड़े कुपोषण, एनीमिया, लगातार भूखे रहने और गंभीर चोटों जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। संगठन का आरोप है कि भीड़भाड़ वाली सड़कों पर लंबे समय तक भारी वजन खींचने और प्रतिकूल परिस्थितियों में काम करने के कारण इन जानवरों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ रहा है। कई मामलों में सड़क दुर्घटनाओं और अत्यधिक शारीरिक श्रम के चलते घोड़ों की दर्दनाक मौतें भी हुई हैं।

संस्था ने यह भी बताया कि इस मुद्दे को लेकर देशभर के 150 से अधिक पशु चिकित्सकों ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री को संयुक्त पत्र भेजकर पर्यटकों की सवारी के लिए उपयोग की जाने वाली घोड़ा-गाड़ियों को तत्काल बंद करने की मांग की है। चिकित्सकों का मानना है कि मौजूदा व्यवस्था में घोड़ों का उचित स्वास्थ्य परीक्षण, देखभाल और कल्याण सुनिश्चित करना संभव नहीं हो पा रहा है, जिससे पशु क्रूरता की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।

PETA India ने अपने प्रस्ताव में मुंबई का उदाहरण भी प्रस्तुत किया है, जहां पारंपरिक घोड़ा-गाड़ियों के स्थान पर आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल विकल्प अपनाने की दिशा में पहल की गई है। संस्था का कहना है कि कोलकाता में भी ई-कैरिज शुरू करने से एक ओर पशुओं पर होने वाले अत्याचार पर रोक लगेगी, वहीं दूसरी ओर घोड़ा-गाड़ी मालिकों और चालकों की आजीविका भी प्रभावित नहीं होगी। इसके लिए सरकार को पुनर्वास, प्रशिक्षण और आर्थिक सहायता से जुड़ी व्यापक योजना लागू करनी चाहिए।

इस विषय पर कलकत्ता उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह शहर में घोड़ों द्वारा खींची जाने वाली गाड़ियों को बंद करने के विषय पर गंभीरता से विचार करे। अदालत ने यह भी कहा है कि यदि ऐसी व्यवस्था समाप्त की जाती है तो उससे जुड़े घोड़ा मालिकों और संचालकों के लिए सम्मानजनक वैकल्पिक आजीविका उपलब्ध कराने की संभावनाओं पर भी काम किया जाए।

पशु कल्याण संगठनों का मानना है कि बदलते समय के साथ पर्यटन व्यवस्था को आधुनिक और मानवीय बनाने की आवश्यकता है। वहीं, इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय राज्य सरकार के स्तर पर लिया जाना है, जिसमें पशु संरक्षण, विरासत, पर्यटन और घोड़ा-गाड़ी संचालकों की आजीविका जैसे सभी पहलुओं को ध्यान में रखा जाएगा।

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