

कोलकाता : मधुमेह के मरीजों के लिए जीवनरक्षक इंसुलिन की बढ़ती कीमतों को लेकर कोलकाता के चिकित्सकों ने चिंता जताई है। डॉक्टरों ने सरकार से इंसुलिन की कीमतों पर सीमा निर्धारित करने और आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को मुफ्त इंसुलिन उपलब्ध कराने की मांग की है।
उनका कहना है कि नियमित इलाज का खर्च उठाने में असमर्थ कई मरीज बीच में ही इंसुलिन लेना बंद कर देते हैं, जिससे उनकी जान को खतरा हो सकता है।
मधुमेह विशेषज्ञों ने प्रत्येक ऐसे मरीज के लिए शून्य लागत वाला इंसुलिन केयर पैकेज शुरू करने का सुझाव दिया, जिन्हें चिकित्सकीय रूप से इसकी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आर्थिक तंगी के कारण किसी मरीज की जान नहीं जानी चाहिए।
बाल रोग विशेषज्ञों ने बताया कि इंसुलिन की कीमत लगभग 2.50 से 6 रुपये प्रति यूनिट तक है। वायल की तुलना में इंसुलिन पेन महंगे होते हैं, लेकिन रोजाना इंजेक्शन लेने वाले मरीजों के लिए इनका इस्तेमाल अपेक्षाकृत आसान और कम दर्दनाक होता है।
उन्होंने बच्चों के इलाज का उदाहरण देते हुए कहा कि अभिभावकों के सामने शिक्षा और दवा के खर्च के बीच संतुलन बनाने की चुनौती खड़ी हो जाती है। भारतीय मरीजों को सामान्यतः प्रतिदिन 20 से 30 यूनिट इंसुलिन की आवश्यकता होती है।
मधुमेह विशेषज्ञों का कहना है कि कई मरीज आर्थिक कठिनाइयों के कारण कुछ सप्ताह बाद ही इंसुलिन लेना बंद कर देते हैं। चिकित्सकों ने सरकार से कीमतों पर नियंत्रण और जरूरतमंदों के लिए सुलभ उपचार व्यवस्था विकसित करने की अपील की, ताकि आर्थिक स्थिति किसी मरीज के इलाज में बाधा न बने।