यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल होंगे डलहौजी और कुम्हारटोली

बंगाल सरकार ने शुरू की पहल
Kolkata
फाइल फोटो
Published on

कोलकाता: पश्चिम बंगाल सरकार कोलकाता की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में बड़ी पहल कर रही है। सरकार अब बीबीडी बाग (पूर्व नाम डलहौजी स्क्वायर) और कुम्हारटोली को यूनेस्को की विश्व धरोहर (वर्ल्ड हेरिटेज) सूची में शामिल कराने की तैयारी कर रही है।

इसके लिए दोनों स्थानों के इतिहास, सांस्कृतिक महत्व और विरासत से जुड़े सभी पहलुओं का विस्तृत दस्तावेज तैयार किया जा रहा है। इसके बाद यूनेस्को के पास नामांकन के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा।

औपनिवेशिक विरासत का प्रतीक है डलहौजी

डलहौजी स्क्वायर कोलकाता के सबसे पुराने और ऐतिहासिक इलाकों में से एक है। ब्रिटिश शासन के दौरान यह प्रशासनिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र था। यहां राइटर्स बिल्डिंग, राजभवन, जनरल पोस्ट ऑफिस (जीपीओ), रिजर्व बैंक सहित कई ऐतिहासिक इमारतें मौजूद हैं।

आज भी यह इलाका कोलकाता की ऐतिहासिक पहचान और औपनिवेशिक वास्तुकला का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है।

कुम्हारटोली की कला को मिलेगी वैश्विक पहचान

कुम्हारटोली अपनी पारंपरिक मूर्तिकला के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। यहां के कारीगर दुर्गा पूजा सहित विभिन्न देवी-देवताओं की मिट्टी की प्रतिमाएं बनाते हैं, जिनकी मांग देश-विदेश तक है।

वर्ष 2021 में यूनेस्को ने दुर्गा पूजा को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची में शामिल किया था। अब राज्य सरकार कुम्हारटोली को भी विश्व धरोहर का दर्जा दिलाने की दिशा में प्रयास कर रही है।

संरक्षण और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

राज्य सरकार का मानना है कि यदि डलहौजी स्क्वायर और कुम्हारटोली को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में जगह मिलती है तो इससे इन दोनों स्थलों के संरक्षण को नई मजबूती मिलेगी।

इसके साथ ही देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की संख्या भी बढ़ेगी, स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे और कोलकाता की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलेगी। इसी उद्देश्य से विशेषज्ञों की मदद से दोनों स्थलों से जुड़ी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जानकारी का दस्तावेजीकरण किया जा रहा है।

Google पर सन्मार्ग न्यूज़ पडे →
logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in