कंपनी का एमडी बन ठगों ने लगाया 1.50 करोड़ का चूना

वॉट्सएप मैसेज से बिछाया जाल, गिरीश पार्क थाने में शिकायत दर्ज
फाइल फोटो
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दीपक, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : महानगर में साइबर अपराधियों का दुस्साहस लगातार बढ़ता जा रहा है। इस बार ठगों ने एक नामी कंपनी का प्रबंध निदेशक (एमडी) बनकर कंपनी के बैंक खाते से सीधे 1.50 करोड़ रुपये पार कर दिए। यह सनसनीखेज मामला गिरीश पार्क थाना क्षेत्र का है। पीड़ित कंपनी के निदेशक ने इस संबंध में गिरीश पार्क थाने में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई है।

वॉट्सएप पर आया था 'फर्जी एमडी' का संदेश

शिकायत के अनुसार, यह पूरी घटना गत 8 जुलाई 2026 की है। कंपनी के अकाउंट्स विभाग को एक अज्ञात मोबाइल नंबर से वॉट्सएप पर एक मैसेज प्राप्त हुआ। मैसेज भेजने वाले शातिर अपराधी ने खुद को कंपनी का मैनेजिंग डायरेक्टर बताया। उसने स्टाफ को गुमराह करते हुए कहा कि एक बेहद जरूरी व्यावसायिक काम के लिए तुरंत फंड ट्रांसफर करने की आवश्यकता है।

सच्चाई जाने बिना आरटीजीएस से ट्रांसफर कर दिए 1.50 करोड़ रुपये

अकाउंट्स विभाग के कर्मचारियों ने अपने वरिष्ठ अधिकारी का आदेश समझकर और सद्भावना में काम करते हुए संदेश को बिल्कुल असली मान लिया। बिना किसी अतिरिक्त सत्यापन के कर्मियों ने आनन-फानन में आरटीजीएस के माध्यम से पूरे 1.50 करोड़ रुपये ठगों द्वारा बताए गए बैंक खाते में स्थानांतरित कर दिए। ये रुपये एक कंपनी के अकाउंट में ट्रांसफर किये गये थे। इस बड़ी धोखाधड़ी का खुलासा अगले दिन 9 जुलाई 2026 को हुआ, जब कंपनी के भीतर एक आंतरिक चर्चा चल रही थी। जब असली मैनेजिंग डायरेक्टर से इस लेन-देन के बारे में बात की गई, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्होंने फंड ट्रांसफर करने का ऐसा कोई निर्देश कभी जारी ही नहीं किया था। इसके बाद कंपनी प्रबंधन के होश उड़ गए और उन्हें समझ आया कि वे एक सोची-समझी साइबर साजिश और जालसाजी का शिकार हो चुके हैं।

कंपनी के निदेशक ने गिरीश पार्क थाने के प्रभारी को सौंपे पत्र में बीनीएस और आईटी एक्ट के तहत धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और जालसाजी का मामला दर्ज करने का अनुरोध किया है। पुलिस ने शिकायत पत्र स्वीकार कर लिया है और साइबर सेल की मदद से मामले की तकनीकी कड़ियों को जोड़ने में जुट गई है। कंपनी ने पुलिस को साक्ष्य के तौर पर आरटीजीएस रसीद और वॉट्सएप चैट के स्क्रीनशॉट भी सौंपे हैं।


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