

कोलकाता : महानगर में साइबर अपराध और डिजिटल ठगी के मामलों में वर्ष 2025 ने 2024 की तुलना में कुछ राहत भरी तस्वीर पेश की है। कोलकाता पुलिस के विभागीय आंकड़ों के अनुसार, जहां वर्ष 2024 में साइबर ठगी की राशि और शिकायतों की संख्या चिंताजनक रूप से ऊंची रही, वहीं वर्ष 2025 में कुल नुकसान में कमी आई है और पीड़ितों को वापस मिली राशि का प्रतिशत उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है।
2024 में भारी नुकसान, रिकवरी महज 9.34 प्रतिशत
वर्ष 2024 में विभिन्न डिविजन और डिटेक्टिव डिपार्टमेंट की इकाइयों में कुल 16,499 शिकायतें दर्ज की गईं। ठगी से कुल 273.93 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जिनमें से मात्र 25.58 करोड़ रुपये (करीब 9.34 प्रतिशत) ही रिकवर हो सके। जादवपुर, बेहला और साइबर पुलिस स्टेशन जैसे प्रमुख डिविजन सबसे अधिक प्रभावित रहे। पुलिस सूत्रों के अनुसार, एंटी बैंक फ्रॉड सेक्शन में 1,502 मामले दर्ज किए गए, जिनमें ठगी की राशि 11.20 करोड़ रुपये थी। इनमें से 2.76 करोड़ रुपये की राशि पुलिस ने रिकवर की। भांगड़ डिविजन में 29 मामले दर्ज हुए, जिनमें ठगी की राशि 5 लाख रुपये थी, लेकिन एक भी रुपया रिकवर नहीं हो सका। सेंट्रल डिविजन में 1,098 साइबर ठगी के मामले दर्ज हुए, जिनमें 15.50 करोड़ रुपये की ठगी की गई। इनमें से 4.88 करोड़ रुपये बरामद किए गए। इस डिविजन की रिकवरी दर सबसे अधिक, यानी 31 प्रतिशत रही। साइबर क्राइम थाने में दर्ज 1,952 मामलों में 54.63 करोड़ की ठगी हुई, जिसमें से 2.21 करोड़ रुपये रिकवर किए गए। ईस्ट डिविजन में 875 मामलों में 20.73 करोड़ रुपये की ठगी हुई, जिनमें से 49 लाख रुपये रिकवर किए गए। ईएसडी में दर्ज 1,461 मामलों में 17.40 करोड़ रुपये की ठगी की गई, जिनमें 1.32 करोड़ रुपये रिकवर किए गए। नॉर्थ डिविजन में दर्ज 1,386 मामलों में 18.55 करोड़ रुपये की ठगी हुई, जिसमें से 1.75 करोड़ रुपये रिकवर किए गए। पोर्ट डिविजन में दर्ज 656 मामलों में 6.54 करोड़ रुपये की ठगी की गई, जिसमें से 84 लाख रुपये रिकवर किए गए। साउथ डिविजन में दर्ज 1,827 मामलों में 20.67 करोड़ रुपये की ठगी हुई, जिनमें से 2.95 करोड़ रुपये रिकवर किए गए। साउथ ईस्ट डिविजन में दर्ज 1,426 मामलों में 26.64 करोड़ रुपये की ठगी हुई, जिनमें से 2.70 करोड़ रुपये रिकवर किए गए। एसएसडी डिविजन में दर्ज 2,238 मामलों में 50.21 करोड़ रुपये की ठगी हुई, जिनमें से 2.67 करोड़ रुपये रिकवर किए गए। वहीं बेहला डिविजन में दर्ज 2,049 मामलों में 31.89 करोड़ की ठगी हुई, जिनमें से 3.01 करोड़ रिकवर किए गए।
2025 में मामलों में कमी, रिकवरी में उछाल
वर्ष 2025 (अब तक) में महानगर में कुल 14,040 साइबर ठगी की शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें ठगी की राशि 207.74 करोड़ रुपये रही। राहत की बात यह है कि इनमें से 37.35 करोड़ रुपये (करीब 17.98 प्रतिशत) की राशि सफलतापूर्वक रिकवर की जा चुकी है। यानी रिकवरी दर पिछले वर्ष की तुलना में लगभग दोगुनी हो गई है। सेंट्रल डिविजन, नॉर्थ डिविजन और साइबर पुलिस स्टेशन जैसे डिविजनों में रिकवरी दर 20 से 40 प्रतिशत तक पहुंची, जबकि सेंट्रल डिविजन में यह 41.12 प्रतिशत दर्ज की गई। पुलिस सूत्रों के अनुसार, एंटी बैंक फ्रॉड सेक्शन में इस वर्ष केवल तीन मामले दर्ज किए गए, जिनमें ठगी की राशि शून्य रही। भांगड़ डिविजन में 187 मामलों में 1.04 करोड़ की ठगी हुई, जिनमें से 20 लाख रुपये रिकवर किए गए। सेंट्रल डिविजन में 1,288 मामलों में 22.95 करोड़ की ठगी हुई, जिनमें से 9.44 करोड़ रुपये बरामद किए गए। इस डिविजन की रिकवरी दर सबसे अधिक, यानी 41 प्रतिशत रही।
साइबर क्राइम थाने में दर्ज 398 मामलों में 2.90 करोड़ रुपये की ठगी हुई, जिनमें से 70 लाख रुपये रिकवर किए गए। ईस्ट डिविजन में दर्ज 770 मामलों में 15.57 करोड़ रुपये की ठगी हुई, जिनमें से 1.58 करोड़ रुपये रिकवर किए गए। ईएसडी में दर्ज 1,590 मामलों में 16.15 करोड़ रुपये की ठगी हुई, जिनमें से 1.79 करोड़ रुपये रिकवर किए गए। नॉर्थ डिविजन में 1,296 मामलों में 16.82 करोड़ की ठगी हुई, जिनमें से 3.57 करोड़ रिकवर किए गए।
पोर्ट डिविजन में दर्ज 690 मामलों में 4.94 करोड़ की ठगी हुई, जिनमें से 81 लाख रिकवर किए गए। साउथ डिविजन में 1,861 मामलों में 31.54 करोड़ की ठगी हुई, जिनमें से 4.43 करोड़ रिकवर किए गए।
साउथ ईस्ट डिविजन में दर्ज 1,435 मामलों में 18.91 करोड़ की ठगी हुई, जिनमें से 3.19 करोड़ रिकवर किए गए। एसएसडी डिविजन में दर्ज 2,255 मामलों में 46.26 करोड़ की ठगी हुई, जिसमें से 8.76 करोड़ रुपये रिकवर किए गए।
वहीं बेहला डिविजन में दर्ज 2,267 मामलों में 30.67 करोड़ की ठगी हुई, जिनमें से 4.88 करोड़ रुपये रिकवर किए गए।
क्या कहना है ज्वाइंट सीपी क्राइम का
कोलकाता पुलिस के ज्वाइंट सीपी क्राइम रुपेश कुमार का कहना है कि इस सुधार के पीछे पुलिस की तेज कार्रवाई, बैंकों के साथ बेहतर समन्वय, साइबर सेल की सक्रियता, समर्पित रिकवरी यूनिट का गठन और नई तकनीकी ट्रैकिंग सिस्टम की भूमिका अहम रही है। जागरूकता अभियानों से भी लोगों ने समय पर शिकायत दर्ज कराई, जिससे फ्रॉड राशि फ्रीज होने में मदद मिली। पुलिस की ओर से लगातार स्कूलों, आवासनों और व्यवसासियों के बीच जाकर साइबर क्राइम के प्रति जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है और इसका लाभ भी हो रहा है।