महानगर में मिथिला का महाकुंभ

सांस्कृतिक चेतना और जड़ों से जुड़ाव का महोत्सव में उमड़ा भीड़ 
महानगर में मिथिला का महाकुंभ
Published on

सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : कोलकाता की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरती, जिसे कला और साहित्य की जननी माना जाता है, मिथिला विकास परिषद के द्वारा तारासुंदरी पार्क मे आयोजित मिथिला विभूति पर्व समारोह का आयोजन  एक बार फिर मिथिला की सुवास से सुवासित हुआ।  'मिथिला विभूति पर्व समारोह एवं मैथिली गीत-संगीत सांस्कृतिक महाकुंभ 2026' केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रवासी मैथिलों की अपनी जड़ों के प्रति अटूट आस्था और भाषाई अस्मिता का शंखनाद साबित हुआ और आयोजन अपने आप में इतिहास और वर्तमान के सामंजस्य का प्रतीक बन कर आम लोगों के लिए साहित्यिक, सामाजिक और सांस्कृतिक चेतनाओं का प्रतीक बन गया ।

अभी हाल मे मिथिला विकास परिषद के पहल पर कोलकाता के डलहौजी स्थित महाराजा लक्ष्मीश्वर सिंह की उदारता, कॉमरेड भोगेंद्र झा और कर्पूरी ठाकुर के संघर्ष और ललित नारायण मिश्र के विजन को समर्पित इस मंच ने उपस्थित मिथिलावासियों को  स्मरण कराता है कि मिथिला की धरती ने सदैव राष्ट्र को दिशा देने वाली विभूतियाँ दी हैं। मिथिला विकास परिषद के द्वारा आयोजित मिथिला विभूति पर्व समारोह की अध्यक्षता मिथिला विकास परिषद के अध्यक्ष अशेक झा एवं उदघाटन सत्र का संचालन श्रीमती नीलम झा ने किया। 

मौके पर उपस्थित अशोक झा ने बताया की किसी  भी समाज की जीवंतता उसकी कला और भाषा में निहित होती है। मैथिली, जो अपनी मिठास और माधुर्य के लिए विश्वविख्यात है, जब कोलकाता के 'लघु मिथिला' अंचल में गूँजेगी, तो वह दृश्य निश्चित ही मंत्रमुग्ध करने वाला होगा। सांस्कृतिक कार्यक्रम का संचालन जाने माने मंच उद्घोषक कमला कान्त झा ने किया । सुश्री जुली झा, श्री विक्रम बिहारी , आदित्यनाथ ठाकुर, विजय इस्सर,श्रीमती देवराती बनर्जी, मास्टर राहुल, श्रीमती हिमाद्रि मिश्रा,जैसे प्रतिष्ठित कलाकारों की स्वर में प्रस्तुत गीत लहरियाँ से सम्पूर्ण वातावरण मिथिलामय हो गया जिससे परिषद के द्वारा आयोजित समारोह जिसके कारण नई पीढ़ी  अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से  परिचित हुआ  विशेष रूप से, कोलकाता की अपनी प्रतिभाओं जैसे श्रीमती हिमाद्रि मिश्रा और मास्टर रोहन की सहभागिता यह दर्शाती है कि बंगाल की इस पावन भूमि पर मैथिली संस्कृति न केवल सुरक्षित है, बल्कि फल-फूल भी रही है।

संगीत पक्ष में श्री मुन्ना और यंत्र संगीत में श्री बिपिन मधुबनी की उपस्थिति इस महाकुंभ को शास्त्रीय और लोक धुनों के चरमोत्कर्ष पर ले गया। मौके पर विवेक झा विधायक ने मैथिली भाषा को भारत की प्राचीनतम भाषा है। कार्यक्रम के दौरान मिथिला विकास परिषद कला के साथ-साथ साहित्य और संस्कृति के साधकों मे श्री कमला कान्त  झा को मिलने वाला 'अटल संवर्द्धना सम्मान' उनकी निरंतर साधना का प्रतिफल है।

  डॉ. बुचरु पासवान को 'कर्पूरी ठाकुर संवर्द्धना सम्मान' और श्री अजय कुमार झा तिरहुतिया को 'यात्री-नागार्जुन सम्मान' के संग श्रीमती सुनयना कुमारी और पूर्व सांसद कामरेड के स्मृति में नाट्याकार फूल चंद्र प्रवीण को अंगवस्त्र, प्रशस्ति, पत्र, पाग़ और प्रतीक चिन्ह प्रदान कर  सम्मानित किया गया कार्यक्रम के दौरान मिथिला के विभूतियों को सम्मानित किये जाने से यह सिद्ध करता है कि समाज अपने उन प्रहरियों को कभी नहीं भूलता जिन्होंने शब्द और कर्म से संस्कृति की रक्षा की है। श्रीमती सुनयना कुमारी।बेगूसराय का सम्मान नारी शक्ति मैथिली संवर्द्धन में उनके योगदान का अभिनंदन है।

कोलकाता जैसे महानगर में, जहाँ भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अक्सर अपनी पहचान खो देते हैं, वहाँ श्री अशोक झा की अध्यक्षता और श्री रघुनाथ चौधरी व श्री नारायण ठाकुर ,के संयोजन में आयोजित यह भव्य कार्यक्रम एक 'सांस्कृतिक सेतु' का कार्य कर रहा है। यह आयोजन उन हजारों मैथिलों को एक मंच पर लाता है जो भौतिक रूप से भले ही मिथिला से दूर हों, लेकिन मानसिक और आत्मिक रूप से आज भी जानकी की उस पवित्र भूमि से जुड़े हुए हैं।

श्रीमती नीलम झा का मंच संचालन और श्री कमला कांत झा के मार्गदर्शन में सांस्कृतिक सत्र की प्रस्तुति इस आयोजन को गरिमा प्रदान करेगी। मैथिल परामर्शदात्री चेयरमैन श्री विनय प्रतिहस्त और समस्त परिषद के सदस्यों का सामूहिक प्रयास यह सुनिश्चित करता है कि यह 'महाकुंभ' ऐतिहासिक और भव्य ।

'मिथिला विभूति पर्व' समारोजल क आई । केवल गीतों की महफिल नहीं है; यह 'मैथिल-मैथिली-मिथिला' के त्रिवेणी संगम का उत्सव है। यह उत्सव है उस माटी की गंध का जो गंगा और कोसी के आंचल से निकलकर हुगली के तट तक पहुंची है। परिषद का यह प्रयास प्रशंसनीय है क्योंकि संस्कृति की रक्षा ही वास्तव में मानवता की रक्षा है।

इस अवसर पर प्रत्येक मैथिल अनुरागी का सपरिवार उपस्थित होना केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि अपनी मातृभाषा और संस्कृति के प्रति एक नैतिक दायित्व है। आइए, तारासुंदरी पार्क के इस पावन प्रांगण में हम सब मिलकर मिथिला की गौरवगाथा का गान करें और संकल्प लें कि हमारी भाषा और संस्कृति की यह लौ कभी मंद नहीं पड़ेगी। कार्यक्रम के दौरान राजेश सिन्हा, पार्षद श्रीमती शैल झा, श्रीमती ममता झा, श्रीमती रूपा चौधरी, शक्ति सिन्हा, अशोक झा द्वितिय , पवन ठाकुर, रमेश झा, नारायण ठाकुर,रघुनाथ चौधरी विनोद झा, अजय चौधरी व अरुण झा समेत कई लोग मौजूद थे।

संबंधित समाचार

No stories found.

कोलकाता सिटी

No stories found.

खेल

No stories found.
logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in