बंगाल में अपराध के आंकड़ों में उछाल: जांच में 'रफ्तार', पर सुरक्षा पर 'सवाल'

महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़े
फाइल फोटो
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कोलकाता: पश्चिम बंगाल के वर्ष 2024 के अपराध आंकड़ों ने राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर मिश्रित तस्वीर सामने रखी है। एक ओर पुलिस की जांच और चार्जशीट दाखिल करने की रफ्तार राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर मानी जा रही है, वहीं दूसरी ओर हिंसक अपराधों में तेज वृद्धि ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नई सरकार के सामने अब अपराधों की जांच के साथ-साथ उनकी रोकथाम की बड़ी चुनौती होगी।

हिंसक अपराधों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी

राज्य में वर्ष 2024 के दौरान हिंसक अपराधों के मामलों में भारी उछाल दर्ज किया गया। आंकड़ों के मुताबिक, 2023 में जहां 22,530 हिंसक अपराध दर्ज हुए थे, वहीं 2024 में यह संख्या बढ़कर 51,244 तक पहुंच गई। यह लगभग 127 प्रतिशत की वृद्धि है। हत्या के मामलों में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2023 में 108 हत्या के मामले दर्ज किए गए थे, जबकि 2024 में यह संख्या बढ़कर 163 हो गई, जो करीब 51 प्रतिशत अधिक है। अपहरण के मामलों ने भी चिंता बढ़ाई है। कुल हिंसक अपराधों में सबसे अधिक हिस्सेदारी अपहरण की रही, जिसके 22,530 मामले सामने आए। इसके अलावा गंभीर चोट पहुंचाने के 7,717 मामले दर्ज किए गए।

महिलाओं के खिलाफ अपराध में तेज उछाल

महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। 2023 में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 564 मामले दर्ज हुए थे, जबकि 2024 में इनकी संख्या बढ़कर 1,118 हो गई। यह लगभग 98 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।

घरेलू हिंसा के मामलों में भी बढ़ोतरी देखी गई। अकेले कोलकाता में पति या रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता के 3,369 मामले दर्ज किए गए। वहीं पीछा करने यानी स्टॉकिंग के 157 मामले सामने आए। आंकड़े संकेत देते हैं कि महिलाओं के लिए खतरा केवल सार्वजनिक स्थानों तक सीमित नहीं, बल्कि घरों के भीतर भी बढ़ रहा है।

कोलकाता में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर

पूरे राज्य की तुलना में राजधानी कोलकाता में हालात कुछ हद तक नियंत्रित नजर आए। शहर में पूरे वर्ष के दौरान हत्या के केवल तीन मामले दर्ज किए गए। हालांकि बच्चों और बुजुर्गों के खिलाफ अपराध चिंता का विषय बने हुए हैं। बच्चों के खिलाफ अपराधों में 235 पीड़ित दर्ज किए गए, जबकि बुजुर्गों पर हमले के तीन मामले सामने आए।

पुलिस की जांच और चार्जशीटिंग में तेजी

रिपोर्ट का सकारात्मक पहलू पुलिस की सक्रियता और जांच की गति रही। आईपीसी और बीएनएस से जुड़े मामलों में पुलिस ने 90.6 प्रतिशत मामलों में चार्जशीट दाखिल की, जिसे बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

संपत्ति संबंधी अपराधों में 20.8 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। साथ ही पुलिस ने चोरी हुई संपत्ति का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा, जिसकी कीमत करीब 39.2 करोड़ रुपये बताई गई है, बरामद करने में सफलता हासिल की।

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