पुस्तक स्टॉल को लेकर माकपा का पलटवार

सुजन चक्रवर्ती बोले—‘सरकार हमेशा किताबों से डरते हैं’
बाम पुस्तक स्टॉल में वरिष्ठ नेता विमान बोस
बाम पुस्तक स्टॉल में वरिष्ठ नेता विमान बोस
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कोलकाता : दुर्गापूजा के दौरान लगने वाले बामपंथी पुस्तक स्टॉलों को लेकर राज्य में राजनीतिक बहस तेज हो गयी है। माकपा ने स्पष्ट किया है कि उसके पूजा पुस्तक स्टॉलों को ‘प्रगतिशील पुस्तक बिक्री केंद्र’ या ‘मार्क्सीय साहित्य पुस्तक विपणि’ के नाम से लगाया जाता है। पार्टी का दावा है कि इन स्टॉलों पर केवल मार्क्सवादी साहित्य ही नहीं, बल्कि राजनीति, इतिहास, साहित्य, मानवाधिकार, विज्ञान, पर्यावरण और बच्चों से जुड़ी किताबें भी उपलब्ध रहती हैं।

माकपा के कोलकाता जिला समिति के सचिव कल्लोल मजूमदार ने कहा कि कुछ स्टॉलों पर ‘शारदोत्सवेर शुभेच्छा’ लिखकर लोगों को शुभकामनाएं दी जाती हैं। पार्टी की ओर से इस तरह के संदेश पर कोई रोक नहीं है। उनके मुताबिक, कोलकाता में दुर्गापूजा के दौरान पुस्तक स्टॉल लगाने की परंपरा कई दशकों पुरानी है। वर्ष 2025 में माकपा ने महानगर में 108 पुस्तक स्टॉल लगाये थे और पूजा के चार दिनों में करीब 44 लाख रुपये की किताबें बिकी थीं।

माकपा नेता सुजन चक्रवर्ती ने कहा कि रवींद्रनाथ ठाकुर भी ‘शारदोत्सव’ शब्द का इस्तेमाल करते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि पुस्तक स्टॉलों और किताबों को लेकर विवाद खड़ा करने के पीछे राजनीतिक उद्देश्य है। सुजन ने कहा, “फासीवादी हमेशा किताबों से डरते हैं।” उनके इस बयान से पुस्तक स्टॉल को लेकर राजनीतिक विवाद और तेज होने के आसार हैं।

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