

कोलकाता : कोलकाता की प्रेसीडेंसी यूनिवर्सिटी में स्वामी विवेकानंद की तस्वीर वाले पोस्टर से कथित छेड़छाड़ को लेकर विवाद गहरा गया है। मामले को गंभीरता से लेते हुए पश्चिम बंगाल सरकार ने जांच के निर्देश दिए हैं और संबंधित अधिकारियों को 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने को कहा है।
राज्य के शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया है कि शैक्षणिक संस्थानों में अनुशासन भंग करने या इस तरह की घटनाओं को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस मामले ने विश्वविद्यालय परिसर में छात्र संगठनों के बीच तनाव को भी बढ़ा दिया है।
स्वामी विवेकानंद के पोस्टर को लेकर उठा विवाद
विवाद की शुरुआत विश्वविद्यालय परिसर में स्वामी विवेकानंद की तस्वीर वाले पोस्टर के कथित रूप से खराब किए जाने और उस पर आपत्तिजनक टिप्पणियां लिखे जाने के आरोपों से हुई। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से जुड़े छात्रों ने इस घटना पर आपत्ति जताते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। संगठन ने मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
इस घटना के बाद विश्वविद्यालय परिसर में छात्र संगठनों के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए। मामले को लेकर राजनीतिक और छात्र संगठनों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं।
15 दिनों में जांच रिपोर्ट देने का निर्देश
राज्य सरकार ने घटना की तह तक पहुंचने और जिम्मेदार लोगों की पहचान करने के उद्देश्य से जांच के निर्देश दिए हैं। संबंधित अधिकारियों को 15 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि पोस्टर के साथ छेड़छाड़ की घटना किन परिस्थितियों में हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में ऐसी गतिविधियों को स्वीकार नहीं किया जा सकता, जो परिसर के शैक्षणिक माहौल और अनुशासन को प्रभावित करती हों। सरकार ने मामले में जवाबदेही तय करने पर जोर दिया है।
वामपंथी छात्र संगठनों ने आरोपों को नकारा
दूसरी ओर, वामपंथी विचारधारा से जुड़े चार छात्र संगठनों ने पोस्टर के साथ छेड़छाड़ की घटना की निंदा की है और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जांच कराने की मांग की है। इन संगठनों ने इस घटना में अपनी संलिप्तता से इनकार किया है। उनका आरोप है कि मामले का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ उठाने के लिए किया जा रहा है।
एबीवीपी ने जहां पुलिस में शिकायत दर्ज कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है, वहीं दूसरे छात्र संगठनों ने भी निष्पक्ष जांच पर जोर दिया है।
ऐसे में जांच रिपोर्ट को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे घटना की परिस्थितियों और जिम्मेदारी तय करने में मदद मिल सकती है। फिलहाल, मामले में आरोपों की जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष सामने आना बाकी है।