

कोलकाता : जादवपुर विश्वविद्यालय परिसर में कार्ल मार्क्स के उद्धरण वाली नई ग्रैफिटी को लेकर उठे विवाद के बीच पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने कहा कि भारत में मार्क्स की विचारधारा पर कोई प्रतिबंध नहीं है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी को भी मार्क्स के विचारों या उद्धरणों को दीवार पर लिखने की स्वतंत्रता है। मामला उस समय चर्चा में आया जब विश्वविद्यालय परिसर में मार्क्स के कथन वाली नई दीवार लेखन सामने आई।
इसे लेकर एबीवीपी की ओर से आपत्ति जताई गई। संगठन की आपत्ति के बाद विश्वविद्यालय परिसर में राजनीतिक विचारधारा और दीवार लेखन को लेकर बहस तेज हो गई।
देशविरोधी नारों और ग्रैफिटी पर सख्त रुख
दिलीप घोष ने कहा कि लोकतांत्रिक देश में दीवार लेखन अपने आप में प्रतिबंधित नहीं है। हालांकि, उन्होंने देश की एकता और अखंडता को चुनौती देने वाले नारों को स्वीकार नहीं करने की बात कही। उनके मुताबिक, सरकार ने पहले भी परिसर से ऐसे नारों और दीवार लेखन को हटाने की कार्रवाई की है।
उन्होंने यह भी कहा कि कार्ल मार्क्स के सिद्धांत या उनके उद्धरण लिखना प्रतिबंधित नहीं है। विवाद का केंद्र विचारधारा नहीं, बल्कि ऐसे संदेश हैं जिन्हें सरकार देश की एकता और अखंडता के खिलाफ मानती है।
जादवपुर में दीवार लेखन पर सियासत तेज
विश्वविद्यालय परिसर में हाल के दिनों में विभिन्न राजनीतिक और वैचारिक संदेशों वाली ग्रैफिटी को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हुई है। सत्ता पक्ष की ओर से जहां कथित देशविरोधी नारों पर कार्रवाई की बात कही जा रही है, वहीं दूसरी ओर परिसर में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
दिलीप घोष के ताजा बयान से यह स्पष्ट है कि सरकार मार्क्सवादी विचारों के उल्लेख और देशविरोधी नारों के बीच अंतर कर रही है। ऐसे में जादवपुर विश्वविद्यालय में दीवार लेखन का मुद्दा फिलहाल राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है।