

कोलकाता : पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस के पूर्व महासचिव और पूर्व विधायक अली इमरान रामज उर्फ 'विक्टर' को आखिरकार पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। साथ ही उन्हें तत्काल प्रभाव से पार्टी के सभी पदों और संगठनात्मक दायित्वों से भी हटा दिया गया है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) में वरिष्ठ नेता के.सी. वेणुगोपाल की मौजूदगी में हुई अनुशासन संबंधी बैठक के बाद उनके निष्कासन पर अंतिम मुहर लगाई गई।
इससे पहले प्रदेश कांग्रेस ने उन पर पार्टी अनुशासन भंग करने और संगठन की नीतियों के विरुद्ध गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाते हुए महासचिव पद से निलंबित कर दिया था। उनकी प्राथमिक सदस्यता भी तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दी गई थी। पार्टी ने उन्हें तीन दिनों के भीतर आरोपों पर लिखित स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया था और स्पष्ट किया था कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
सूत्रों के मुताबिक, पार्टी नेतृत्व के पास विक्टर के खिलाफ कई गंभीर शिकायतें पहुंची थीं। विक्टर के करीबी लोगों का दावा है कि सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक पत्र में उनकी पत्नी द्वारा लगाए गए घरेलू हिंसा के आरोपों का भी उल्लेख था। बताया जाता है कि यह शिकायत विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी नेतृत्व को सौंपी गई थी। हालांकि कांग्रेस ने आधिकारिक रूप से निष्कासन का कारण केवल अनुशासनहीनता और संगठन-विरोधी गतिविधियों को बताया है।
गौरतलब है कि कांग्रेस ने 2026 के विधानसभा चुनाव में विक्टर को चाकुलिया विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया था। इससे पहले वह 2024 के लोकसभा चुनाव में रायगंज संसदीय क्षेत्र से भी कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कार्रवाई प्रदेश कांग्रेस द्वारा अनुशासन को लेकर अपनाए जा रहे सख्त रुख का संकेत है।