

सतीश, सन्मार्ग संवाददाता
हुगली : “बंगाल में कांग्रेस की पहली लड़ाई भाजपा से है।” यह कहना है जम्मू-कश्मीर के डूरू विधानसभा क्षेत्र के विधायक गुलाम अहमद मीर का। उन्होंने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस हार-जीत की परवाह किए बिना अकेले चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है। कांग्रेस के ‘एकला चलो’ आह्वान से कार्यकर्ताओं में उत्साह देखा जा रहा है। पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव इस बार अकेले लड़ने का फैसला पार्टी ने कर लिया है। इस ऐलान से कार्यकर्ताओं में नया जोश है। वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में वाममोर्चा के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ना कांग्रेस के लिए फायदेमंद साबित नहीं हुआ था। गठबंधन के बावजूद पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली। कार्यकर्ताओं का मानना है कि इस समझौते से कांग्रेस को ही नुकसान हुआ। ग्रामीण और मुफस्सिल इलाकों में ‘हाथ’ चुनाव चिह्न के पारंपरिक मतदाता भी दुविधा में पड़ गए थे। कांग्रेस समर्थकों ने वाम उम्मीदवारों को वोट नहीं दिया, वहीं वाम समर्थकों ने कांग्रेस प्रत्याशियों से दूरी बनाए रखी। परिणामस्वरूप पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा। इसी अनुभव से सबक लेते हुए पार्टी नेतृत्व ने इस बार अकेले चुनाव मैदान में उतरने का निर्णय लिया है।
भाजपा से सीधी टक्कर की तैयारी में बंगाल कांग्रेस
प्रदेश अध्यक्ष शुभंकर सरकार और पर्यवेक्षक गुलाम अहमद मीर ने दिल्ली में केंद्रीय नेतृत्व के साथ बैठक के बाद स्पष्ट कर दिया कि कांग्रेस अपने दम पर चुनाव लड़ेगी। इसके बाद से संगठन में नई ऊर्जा देखी जा रही है। चंदननगर में हुगली जिला-1 के संगठनात्मक क्षेत्र के बीएलए-2 कार्यकर्ताओं के साथ एक बैठक की गई, जिसमें विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों के सक्रिय कार्यकर्ता शामिल हुए। कार्यकर्ताओं का कहना है कि हार-जीत चाहे जो हो, अकेले लड़ाई ही पार्टी के लिए बेहतर होगी। पुराने कार्यकर्ता भी नए जोश के साथ काम में जुटने को तैयार हैं। गुलाम अहमद मीर ने कहा, “राहुल गांधी से भाजपा डर गई है, इसलिए उनकी संसद सदस्यता रद्द करने की मांग की जा रही है। उन्हें बोलने से रोका जा रहा है। वे गरीबों, किसानों और मजदूरों के नेता हैं।” उन्होंने बताया कि 85 हजार बूथों में से कांग्रेस ने 46 हजार बीएलए-2 की सूची चुनाव आयोग को सौंप दी है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में कांग्रेस की पहली लड़ाई भाजपा से है, उसके बाद टीएमसी से। बंगाल की जनता धर्मनिरपेक्ष सोच रखती है और धर्म की राजनीति को पसंद नहीं करती। अब देखना यह है कि पिछली बार गठबंधन में शून्य पर सिमटने वाली कांग्रेस इस बार अकेले चुनाव लड़कर कितना जनसमर्थन हासिल कर पाती है। इस कार्यक्रम में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य प्रीतम घोष सहित अन्य कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।