

मधुर, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकात : राज्य में डेंगू का खतरा बढ़ने के साथ ही स्वास्थ्य विभाग के सामने दवाओं और सलाइन की उपलब्धता सुनिश्चित करने की चुनौती भी बढ़ गई है। हालांकि स्वास्थ्य भवन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि फिलहाल राज्य में दवाओं और सलाइन की कोई कमी नहीं है। डेंगू के इलाज के लिए फिलहाल कोई विशेष दवा उपलब्ध नहीं है। मरीज की स्थिति और लक्षणों के आधार पर उपचार किया जाता है। इस दौरान सामान्य सलाइन, रिंगर लैक्टेट और बुखार कम करने के लिए पैरासिटामोल का इस्तेमाल प्रमुख रूप से किया जाता है। राज्य में इनकी आपूर्ति करने वाली तीन कंपनियों, पश्चिम बंगाल फार्मास्युटिकल्स, फार्मा इम्पेक्स और निभी रेमिडीज पर उत्पादन रोकने के निर्देश जारी किए गए हैं।
ओडिशा से सलाइन, उत्तर प्रदेश से दवाएं
वैकल्पिक व्यवस्था के तहत ओडिशा की एक कंपनी को सलाइन की आपूर्ति का ठेका दिया गया है। कंपनी अब तक करीब एक लाख इकाई द्रव की आपूर्ति कर चुकी है। लेकिन डेंगू के मौसम में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की पूरी जरूरत केवल एक कंपनी से पूरी करना मुश्किल माना जा रहा है। इसी वजह से स्वास्थ्य विभाग ने उत्तर प्रदेश की एक कंपनी से सामान्य सलाइन, रिंगर लैक्टेट और पैरासिटामोल इंजेक्शन की आपूर्ति के लिए संपर्क किया है। संबंधित कंपनी ने करीब 10 दिनों के भीतर आपूर्ति शुरू करने का भरोसा दिया है।
हर साल करोड़ों दवाओं की जरूरत
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में हर वर्ष करीब 6 लाख इकाई रिंगर लैक्टेट और 2 लाख इकाई सामान्य सलाइन की जरूरत होती है। इसके अलावा करीब 2.5 करोड़ पैरासिटामोल 650 मिलीग्राम की गोलियां, एक करोड़ पैरासिटामोल 500 मिलीग्राम की गोलियां और करीब 6 लाख इकाई पैरासिटामोल इंजेक्शन की आवश्यकता होती है। इस बीच बेहला की कंपनी ने अपनी कमियों से संबंधित अनुपालन रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग को सौंप दी है। यदि औषधि नियंत्रण विभाग से उसे मंजूरी मिल जाती है तो राज्य में दवाओं और सलाइन की आपूर्ति की स्थिति में सुधार होने की उम्मीद है।